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बाढ़ से त्रस्त जनता, प्रशांत किशोर की अनुपस्थिति पर सवाल
बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच, राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के सार्वजनिक रूप से नजर न आने पर जनता सवाल उठा रही है। लोग उनकी तुलना पिछले नेताओं से कर रहे हैं।
बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच आम जनता जहां दाने-दाने को मोहताज है और बाढ़ से त्राहिमाम कर रही है, वहीं राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर जीत के जश्न के बाद से जनता के बीच नजर नहीं आ रहे हैं। उनकी इस अनुपस्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी है और वे सवाल उठा रहे हैं।
जनता की मानें तो प्रशांत किशोर की यह स्थिति पिछले नेताओं जैसी ही है, जो चुनाव जीतने या किसी विशेष अवसर पर सामने तो आते हैं, लेकिन संकट के समय में गायब हो जाते हैं। बाढ़ पीड़ितों को तत्काल सहायता और राहत की आवश्यकता है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रमुख राजनीतिक हस्तियों की सक्रियता नगण्य दिख रही है।
इस मुश्किल घड़ी में लोगों को उम्मीद थी कि प्रशांत किशोर जैसे प्रभावशाली व्यक्ति बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और पीड़ितों की सुध लेंगे। लेकिन उनके सार्वजनिक रूप से अनुपस्थित रहने से जनता में निराशा का भाव है। यह स्थिति बिहार के आम नागरिकों के प्रति राजनीतिक वर्ग की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती है।
जनता की मानें तो प्रशांत किशोर की यह स्थिति पिछले नेताओं जैसी ही है, जो चुनाव जीतने या किसी विशेष अवसर पर सामने तो आते हैं, लेकिन संकट के समय में गायब हो जाते हैं। बाढ़ पीड़ितों को तत्काल सहायता और राहत की आवश्यकता है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रमुख राजनीतिक हस्तियों की सक्रियता नगण्य दिख रही है।
इस मुश्किल घड़ी में लोगों को उम्मीद थी कि प्रशांत किशोर जैसे प्रभावशाली व्यक्ति बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और पीड़ितों की सुध लेंगे। लेकिन उनके सार्वजनिक रूप से अनुपस्थित रहने से जनता में निराशा का भाव है। यह स्थिति बिहार के आम नागरिकों के प्रति राजनीतिक वर्ग की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती है।