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05 नव. 2026•
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अपराध

बड़ी खबर जिला बार एसोसिएशन अमेठी का फूटा आक्रोश: कालपी बार अध्यक्ष की हत्या पर अधिवक्ताओं ने खोला मोर्चा

✍️ रिपोर्टर: Dinkar Kumar Mahara 🗓 05 नव. 2026, 06:20 AM 👁 19
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पहले पैर छुए, फिर कार में अगवा किया... और जब तक सांसें थम नहीं गईं, सिर पर जैक से वार करते रहे! हड्डियां तक चकनाचूर कर दीं।

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से सामने आई यह घटना किसी की भी रूह कंपा देने वाली है। कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार (68) को जमीन के विवाद में ऐसी खौफनाक साजिश का शिकार बनाया गया कि सुनकर हर कोई सन्न रह जाए।

शनिवार शाम अधिवक्ता रोज की तरह उरई कोर्ट से घर लौटे थे। शाम करीब 3:30 बजे वह मुन्ना फुलपावर चौराहे पहुंचे और बेटे हर्ष को स्कूटी लेकर बुलाया। उन्होंने बेटे से कहा कि दुर्गा मंदिर चौराहे पर एक मुवक्किल उनका इंतजार कर रहा है। बेटा उन्हें वहां छोड़ने पहुंचा।

वहां पहले से एक सफेद रंग की कार खड़ी थी। कार में सवार युवकों में से एक ने अधिवक्ता को देखते ही 'चाचा' कहकर उनके पैर छुए। परिवार और परिचित होने का भरोसा दिलाने के लिए अपनापन दिखाया। इसके बाद केस के सिलसिले में बैठकर बात करने का बहाना बनाया और उन्हें कार में बैठा लिया।

बेटा कुछ समझ पाता, उससे पहले कार की रफ्तार तेज हो गई और पिता उसकी आंखों के सामने से ओझल हो गए।

लेकिन यह कोई सामान्य अपहरण नहीं था। आरोप है कि अधिवक्ता को जालौन से अगवा कर कानपुर की ओर ले जाया गया। रास्ते में कई थानों और जिलों की सीमाएं पार करते हुए करीब 70 किलोमीटर दूर गुजैनी नहर के पास ले जाकर उनकी बेरहमी से ह*त्या कर दी गई।

सिर पर ट्रक के जैक से किए ताबड़तोड़ वार

पुलिस को घटनास्थल के पास खू*न से सना ट्रक का जैक मिला। आरोप है कि इसी जैक से अधिवक्ता के सिर पर तब तक वार किए गए, जब तक उनकी जान नहीं चली गई। हमले इतने भीषण थे कि शरीर की हड्डियां तक चकनाचूर हो गईं।

रविवार सुबह कानपुर के गुजैनी नहर क्षेत्र से उनका श*व बरामद हुआ। शव मिलने की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। जिस पिता को बेटा कुछ घंटे पहले स्कूटी से छोड़कर आया था, अब वह कभी वापस नहीं लौटने वाला था।

जमीन का विवाद और सुपारी देकर ह*त्या की आशंका

एएसपी डॉ. ईशान सोनी के मुताबिक, अधिवक्ता गयादीन अहिरवार और कानपुर निवासी इंद्रजीत यादव के बीच जमीन को लेकर मुकदमेबाजी चल रही थी। पुलिस के अनुसार इसी विवाद में इंद्रजीत ने मोनू यादव को ह**त्या की सुपारी दी थी। मोनू और उसके साथियों पर वारदात को अंजाम देने का आरोप है।

पुलिस ने शक के आधार पर तीन आरोपियों आशीष विश्वकर्मा, सर्वेश शुक्ला और केशव को हिरासत में लिया। उनकी निशानदेही पर श*व बरामद किया गया।

कार बरामदगी के दौरान पुलिस से मुठभेड़

देर रात आरोपियों को कार बरामदगी के लिए कालपी के जंगल में ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान आरोपियों ने भागने की कोशिश की और पहले से छिपाए गए असलहों से फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में आशीष और सर्वेश के पैर में गो*ली लगी। तीसरे आरोपी केशव को भी पकड़ लिया गया। मुख्य आरोपी मोनू यादव की तलाश जारी है।

इस ह*त्याकांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या जमीन का वर्षों पुराना विवाद इस खौफनाक वारदात की वजह बना? क्या वर्ष 2005 से चल रही मुकदमेबाजी ने दुश्मनी की ऐसी शक्ल ले ली कि एक वरिष्ठ अधिवक्ता की जा*न ले ली गई?

एक तरफ कानून की लड़ाई लड़ने वाला 68 वर्षीय अधिवक्ता खुद अपराधियों की साजिश का शिकार हो गया, दूसरी तरफ परिवार के सामने अब इंसाफ की लंबी लड़ाई खड़ी है।

जिस व्यक्ति ने जीवनभर अदालत में कानून और न्याय की लड़ाई लड़ी, उसकी जिंदगी का अंत धोखे से अगवा कर की गई बेरहम ह*त्या के साथ हुआ।

सवाल सिर्फ एक अधिवक्ता की ह*त्या का नहीं है, सवाल उस भरोसे का भी है, जिसका इस्तेमाल अपराधियों ने पहले पैर छूकर किया और फिर उसी भरोसे को मौत के जाल में बदल दिया।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें और शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। 🙏

आपकी नजर में जमीन के विवाद में इस तरह की सुपारी देकर ह*त्या करने वालों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जो समाज के लिए नजीर बने? अपनी राय जरूर लिखें।
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