📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
बीजेपी, एसपी और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में सत्ता की लड़ाई
✍️ News18
🗓 10 अक्टू. 2026, 09:15 AM
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बीजेपी, एसपी और कांग्रेस पूर्वांचल में अपनी-अपनी मोर्चाबंदी तेज कर रहे हैं, जहाँ योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव और राहुल गांधी प्रमुख रूप से अभियान चला रहे हैं।
पूर्वांचल, उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित और वाराणसी, गोरखपुर, आज़मगढ़ जैसे जिलों को शामिल करने वाला क्षेत्र, आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन गया है। इस क्षेत्र के बड़े मतदाता वर्ग और शहरी‑ग्रामीण मिश्रित जनसंख्या किसी भी पार्टी के लिए बहुमत हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुख्य चेहरा बनाकर विकास कार्यों और कानून‑व्यवस्था पर ज़ोर दिया है, और वे लगातार इस क्षेत्र में यात्रा कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रोजगार और सामाजिक कल्याण के वादे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने राहुल गांधी को अपने प्रभाव को पुनः स्थापित करने और युवा वोटरों को आकर्षित करने के लिए प्रमुख भूमिका दी है।
तीनों पार्टियों ने उच्च‑प्रोफ़ाइल रैलियों, घर‑घर जाकर संपर्क और मीडिया अभियानों के माध्यम से विभिन्न समुदायों को प्रभावित करने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वांचल में परिणाम पूरे उत्तर प्रदेश की शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यहाँ कई विधानसभा सीटें हैं।
क्षेत्र में मतदाता भावना अभी भी बदलती हुई दिख रही है, जहाँ कृषि, बुनियादी ढाँचा और साम्प्रदायिक सद्भाव जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में हैं। इस तीव्र प्रतिस्पर्धा से स्पष्ट होता है कि पूर्वांचल राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में कितना महत्वपूर्ण है।
भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुख्य चेहरा बनाकर विकास कार्यों और कानून‑व्यवस्था पर ज़ोर दिया है, और वे लगातार इस क्षेत्र में यात्रा कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रोजगार और सामाजिक कल्याण के वादे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने राहुल गांधी को अपने प्रभाव को पुनः स्थापित करने और युवा वोटरों को आकर्षित करने के लिए प्रमुख भूमिका दी है।
तीनों पार्टियों ने उच्च‑प्रोफ़ाइल रैलियों, घर‑घर जाकर संपर्क और मीडिया अभियानों के माध्यम से विभिन्न समुदायों को प्रभावित करने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वांचल में परिणाम पूरे उत्तर प्रदेश की शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यहाँ कई विधानसभा सीटें हैं।
क्षेत्र में मतदाता भावना अभी भी बदलती हुई दिख रही है, जहाँ कृषि, बुनियादी ढाँचा और साम्प्रदायिक सद्भाव जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में हैं। इस तीव्र प्रतिस्पर्धा से स्पष्ट होता है कि पूर्वांचल राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में कितना महत्वपूर्ण है।