📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ajit Anjum
राजनीति
बजट चुनाव से पहले भाजपा ने अजय राय को हटाया, बनारस में विवाद
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 03 नव. 2026, 05:16 AM
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तीन लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के खिलाफ ताल ठोकने और बनारस में विरोध का सामना करने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता अजय राय को 2027 के चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी से निकाला गया।
वाराणसी, उत्तर प्रदेश – भाजपा ने 2027 के लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले अपने वरिष्ठ नेता अजय राय को पार्टी से बाहर कर दिया। अजय राय, जो योगी आदित्यनाथ सरकार में पूर्व मंत्री रहे हैं, ने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ताल ठोकने के बाद पार्टी के भीतर विरोध का केंद्र बन गए।
उनके हटाए जाने के बाद बनारस में कई भाजपा विधायक और समर्थक एकत्रित होकर इस कदम के खिलाफ आक्रोश सभा आयोजित कर रहे थे। पार्टी के भीतर के सूत्रों के अनुसार, आगामी चुनाव में एकजुट छवि पेश करने के लिए यह कदम उठाया गया।
भाजपा ने अभी तक विस्तृत बयान नहीं दिया है, परन्तु अंदरूनी लोगों का कहना है कि राय की खुली आलोचना और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उन्हें अब पार्टी में बनाए रखना असंभव बना दिया। यह कार्रवाई आगामी 2027 के चुनावों की तैयारी में अनुशासन कड़ाई से लागू करने की इच्छा को दर्शाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राय जैसे प्रभावशाली नेता को हटाना, पार्टी के भीतर से विरोधियों को हतोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, विशेषकर उन लोगों को जो प्रधानमंत्री के नेतृत्व को चुनौती देते रहे हैं।
यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गतिशीलता में नई जटिलता जोड़ता है, जहाँ किसी भी राष्ट्रीय पार्टी के लिए मतों की लड़ाई निर्णायक होती है।
उनके हटाए जाने के बाद बनारस में कई भाजपा विधायक और समर्थक एकत्रित होकर इस कदम के खिलाफ आक्रोश सभा आयोजित कर रहे थे। पार्टी के भीतर के सूत्रों के अनुसार, आगामी चुनाव में एकजुट छवि पेश करने के लिए यह कदम उठाया गया।
भाजपा ने अभी तक विस्तृत बयान नहीं दिया है, परन्तु अंदरूनी लोगों का कहना है कि राय की खुली आलोचना और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने उन्हें अब पार्टी में बनाए रखना असंभव बना दिया। यह कार्रवाई आगामी 2027 के चुनावों की तैयारी में अनुशासन कड़ाई से लागू करने की इच्छा को दर्शाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राय जैसे प्रभावशाली नेता को हटाना, पार्टी के भीतर से विरोधियों को हतोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, विशेषकर उन लोगों को जो प्रधानमंत्री के नेतृत्व को चुनौती देते रहे हैं।
यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गतिशीलता में नई जटिलता जोड़ता है, जहाँ किसी भी राष्ट्रीय पार्टी के लिए मतों की लड़ाई निर्णायक होती है।