📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rahul.9009
धर्म
बिहार के सिद्धपीठ दुर्गा मंदिर की 12‑घंटे की 2 किमी विसर्जन यात्रा
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 13 अक्टू. 2026, 03:15 PM
👁 14
सिद्धपीठ दुर्गा मंदिर में 2 किमी की विसर्जन यात्रा को पूरा करने में लगभग 12 घंटे लगते हैं, यह परंपरा 221 फीट ऊँची मीनार और 90‑वर्षीय इतिहास से जुड़ी है।
सिद्धपीठ दुर्गा मंदिर, बिहार के बेगूसराय जिले के बीहट गांव में स्थित, देवी दुर्गा को समर्पित 221 फीट ऊँची मीनार के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर ने लगभग एक शताब्दी पुरानी एक विशिष्ट अनुष्ठान को संरक्षित किया है, जिसमें भक्त 2 किलोमीटर की विसर्जन यात्रा करते हैं, जिसे पूरा करने में लगभग 12 घंटे लगते हैं।
विसर्जन यात्रा मंदिर के मुख्य द्वार से शुरू होती है और एक घुमावदार पथ का अनुसरण करती है जो नज़दीकी नदी के किनारे तक पहुँचती है। भक्त छोटी-छोटी पानी की प्यालियाँ लेकर चलते हैं और रास्ते में विभिन्न शरणस्थलों पर प्रार्थना करते हैं, हर माइलस्टोन पर एक प्रतीकात्मक भक्ति क्रिया करते हैं। इस विस्तारित यात्रा का उद्देश्य भक्त की सहनशक्ति और देवी के प्रति समर्पण का परीक्षण करना है।
स्थानीय पुरोहितों का कहना है कि यह परंपरा मंदिर के इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना को याद रखने के लिए स्थापित की गई थी, और यह सिद्धपीठ की आध्यात्मिक पहचान का एक प्रमुख हिस्सा बन गई है। 12‑घंटे की यात्रा हर वर्ष हजारों भक्तों को आकर्षित करती है, विशेषकर नवरात्रि के दौरान जब मंदिर के अनुष्ठान चरम पर पहुँचते हैं।
मंदिर का दौरा करने वाले आगंतुक शांत वातावरण और समुदाय की भावना को भी नोट करते हैं। यह अभ्यास बिहार के बाहर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है, जिससे पड़ोसी राज्यों के भक्त इस अनूठे भक्ति अनुभव को जीने के लिए आते हैं।
विसर्जन यात्रा मंदिर के मुख्य द्वार से शुरू होती है और एक घुमावदार पथ का अनुसरण करती है जो नज़दीकी नदी के किनारे तक पहुँचती है। भक्त छोटी-छोटी पानी की प्यालियाँ लेकर चलते हैं और रास्ते में विभिन्न शरणस्थलों पर प्रार्थना करते हैं, हर माइलस्टोन पर एक प्रतीकात्मक भक्ति क्रिया करते हैं। इस विस्तारित यात्रा का उद्देश्य भक्त की सहनशक्ति और देवी के प्रति समर्पण का परीक्षण करना है।
स्थानीय पुरोहितों का कहना है कि यह परंपरा मंदिर के इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना को याद रखने के लिए स्थापित की गई थी, और यह सिद्धपीठ की आध्यात्मिक पहचान का एक प्रमुख हिस्सा बन गई है। 12‑घंटे की यात्रा हर वर्ष हजारों भक्तों को आकर्षित करती है, विशेषकर नवरात्रि के दौरान जब मंदिर के अनुष्ठान चरम पर पहुँचते हैं।
मंदिर का दौरा करने वाले आगंतुक शांत वातावरण और समुदाय की भावना को भी नोट करते हैं। यह अभ्यास बिहार के बाहर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है, जिससे पड़ोसी राज्यों के भक्त इस अनूठे भक्ति अनुभव को जीने के लिए आते हैं।