📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Extra999
सरकारी योजना
बिहार में 2026 नीति से सहकारी समितियों को मिलेगी अधिक शक्ति
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 01 सित. 2026, 01:36 PM
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बिहार सरकार ने 2026 की सहकारी नीति को लागू करने के लिए सहकारी अधिनियम और नियमावली में संशोधन पर चर्चा शुरू की, जिससे समितियों को अधिक अधिकार और आत्मनिर्भरता मिलेगी।
बिहार के सहकारी विभाग ने राज्य के सहकारी अधिनियम और नियमावली में संशोधन करने के लिए परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। यह बदलाव बिहार सहकारी नीति 2026 को लागू करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिससे पंजीकृत सहकारी समितियों को अधिक निर्णय‑निर्धारण शक्ति मिलेगी।
अधिकारियों का कहना है कि संशोधन से शासन में सुगमता आएगी, समितियों को बड़े वित्तीय लेन‑देन संभालने की अनुमति मिलेगी और बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता घटेगी। अधिक स्वायत्तता से सहकारी संस्थाएँ आत्मनिर्भर बनेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं की सेवा में बेहतर भूमिका निभा सकेंगी।
सहकारी मंत्री ने बताया कि सशक्त सहकारी संस्थाएँ कृषि विपणन, ऋण पहुँच और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देंगी। इस प्रक्रिया में क्षेत्र के हितधारकों को अपना मत देने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसके बाद मसौदा विधेयक राज्य मंत्रिमंडल को प्रस्तुत किया जाएगा।
स्वीकृति मिलने पर संशोधित ढाँचा क्रमिक रूप से लागू किया जाएगा, साथ ही सहकारी नेताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र स्थापित किए जाएंगे। यह कदम राज्य की जमीनी संस्थाओं को सुदृढ़ करने और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति के अनुरूप है।
अधिकारियों का कहना है कि संशोधन से शासन में सुगमता आएगी, समितियों को बड़े वित्तीय लेन‑देन संभालने की अनुमति मिलेगी और बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता घटेगी। अधिक स्वायत्तता से सहकारी संस्थाएँ आत्मनिर्भर बनेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं की सेवा में बेहतर भूमिका निभा सकेंगी।
सहकारी मंत्री ने बताया कि सशक्त सहकारी संस्थाएँ कृषि विपणन, ऋण पहुँच और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देंगी। इस प्रक्रिया में क्षेत्र के हितधारकों को अपना मत देने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसके बाद मसौदा विधेयक राज्य मंत्रिमंडल को प्रस्तुत किया जाएगा।
स्वीकृति मिलने पर संशोधित ढाँचा क्रमिक रूप से लागू किया जाएगा, साथ ही सहकारी नेताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र स्थापित किए जाएंगे। यह कदम राज्य की जमीनी संस्थाओं को सुदृढ़ करने और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति के अनुरूप है।