📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann (talk)
टेक्नोलॉजी
बिहार मंत्री ने प्राचीन पांडुलिपियों के अनुवाद के लिए एआई पहल की घोषणा की
✍️ The Times of India
🗓 03 सित. 2026, 01:48 AM
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राज्य सरकार प्राचीन पांडुलिपियों के अनुवाद के लिए कृत्रिम‑बुद्धिमत्ता उपकरणों का उपयोग करेगी, जिससे बिहार की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और डिजिटल किया जा सकेगा।
पटना, बिहार – बिहार सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने घोषणा की कि प्राचीन पांडुलिपियों के अनुवाद के लिए कृत्रिम‑बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। यह कदम राज्य के अभिलेखागार और पुस्तकालयों में संग्रहीत नाजुक ग्रंथों को डिजिटाइज़ करके उनकी सुरक्षा को सुदृढ़ करने के व्यापक सांस्कृतिक संरक्षण अभियान का हिस्सा है।
मंत्री ने बताया कि एआई प्रणाली को तकनीकी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया गया है और पहले इसे कुछ चुनिंदा संस्कृत तथा क्षेत्रीय भाषा की पांडुलिपियों पर परीक्षण किया जाएगा, जिनकी आयु कई शताब्दी पुरानी है। सफल अनुवाद के बाद इन ग्रंथों को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे शोधकर्ता, छात्र और आम जनता को इनका उपयोग आसान होगा।
अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना बिहार के ऐतिहासिक साहित्य पर अनुसंधान को तेज़ करेगी और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में स्वदेशी स्रोतों को शामिल करने में मदद करेगी। यह पहल डिजिटल इंडिया एजेंडा के साथ भी मेल खाती है, जिसका लक्ष्य उन्नत तकनीक के माध्यम से विरासत प्रबंधन को आधुनिक बनाना है।
परियोजना का कार्यान्वयन आने वाले महीनों में शुरू होने की संभावना है, जिसमें पहले लगभग एक हजार पांडुलिपियों को पायलट चरण में अनुवादित किया जाएगा, उसके बाद पूरी संग्रह पर विस्तार किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि एआई प्रणाली को तकनीकी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया गया है और पहले इसे कुछ चुनिंदा संस्कृत तथा क्षेत्रीय भाषा की पांडुलिपियों पर परीक्षण किया जाएगा, जिनकी आयु कई शताब्दी पुरानी है। सफल अनुवाद के बाद इन ग्रंथों को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे शोधकर्ता, छात्र और आम जनता को इनका उपयोग आसान होगा।
अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना बिहार के ऐतिहासिक साहित्य पर अनुसंधान को तेज़ करेगी और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में स्वदेशी स्रोतों को शामिल करने में मदद करेगी। यह पहल डिजिटल इंडिया एजेंडा के साथ भी मेल खाती है, जिसका लक्ष्य उन्नत तकनीक के माध्यम से विरासत प्रबंधन को आधुनिक बनाना है।
परियोजना का कार्यान्वयन आने वाले महीनों में शुरू होने की संभावना है, जिसमें पहले लगभग एक हजार पांडुलिपियों को पायलट चरण में अनुवादित किया जाएगा, उसके बाद पूरी संग्रह पर विस्तार किया जाएगा।