📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Krishna kumar krishna2
अपराध
बिहार में आईपीएस ने पालतू पशु के स्वामित्व विवाद में डीएनए जांच का आदेश दिया
✍️ Amar Ujala · Gaya
🗓 26 अग. 2026, 11:03 AM
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गया, बिहार में एक पालतू पशु के स्वामित्व विवाद को सुलझाने के लिए आईपीएस ने डीएनए जांच का आदेश दिया है।
गया, बिहार में एक पालतू पशु के स्वामित्व को लेकर दो पक्षों में विवाद उत्पन्न हुआ, जिससे स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। दोनों पक्षों ने वही पशु अपना बताकर मामला बढ़ा दिया।
विवाद की जाँच के लिए जिम्मेदार भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी ने पशु पर डीएनए परीक्षण का आदेश जारी किया। यह आदेश वैज्ञानिक आधार पर सही मालिक का निर्धारण करने के उद्देश्य से दिया गया, क्योंकि दस्तावेज़ी प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।
गया पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बताया कि नमूना एक पशु‑विज्ञान फोरेंसिक लैब में भेजा जाएगा और परिणाम कुछ हफ्तों में मिलने की उम्मीद है। परिणाम के आधार पर पालतू के स्वामित्व पर अंतिम कानूनी निर्णय लिया जाएगा।
भारत में पालतू पशुओं पर डीएनए परीक्षण अभी दुर्लभ है, इसलिए यह मामला नागरिक विवाद में फोरेंसिक विज्ञान के प्रयोग के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अधिकारियों को आशा है कि यह विधि स्पष्ट और निष्पक्ष समाधान प्रदान करेगी।
संबंधित पक्षों को परीक्षण के परिणाम का इंतजार करने को कहा गया है, और पुलिस ने जनता को आश्वासन दिया है कि प्रक्रिया पारदर्शी होगी और मौजूदा कानूनों के अनुरूप चलेगी।
विवाद की जाँच के लिए जिम्मेदार भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी ने पशु पर डीएनए परीक्षण का आदेश जारी किया। यह आदेश वैज्ञानिक आधार पर सही मालिक का निर्धारण करने के उद्देश्य से दिया गया, क्योंकि दस्तावेज़ी प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।
गया पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बताया कि नमूना एक पशु‑विज्ञान फोरेंसिक लैब में भेजा जाएगा और परिणाम कुछ हफ्तों में मिलने की उम्मीद है। परिणाम के आधार पर पालतू के स्वामित्व पर अंतिम कानूनी निर्णय लिया जाएगा।
भारत में पालतू पशुओं पर डीएनए परीक्षण अभी दुर्लभ है, इसलिए यह मामला नागरिक विवाद में फोरेंसिक विज्ञान के प्रयोग के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अधिकारियों को आशा है कि यह विधि स्पष्ट और निष्पक्ष समाधान प्रदान करेगी।
संबंधित पक्षों को परीक्षण के परिणाम का इंतजार करने को कहा गया है, और पुलिस ने जनता को आश्वासन दिया है कि प्रक्रिया पारदर्शी होगी और मौजूदा कानूनों के अनुरूप चलेगी।