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बहराइच के जरवल में ट्रक से टकराकर घायल हिरन की मौत, पशु चिकित्सा केंद्र बंद रहने पर इलाज नहीं मिला
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के जरवल क्षेत्र में एक नर हिरन को भारत गैस एजेंसी के पास अज्ञात वाहन से टकराकर गंभीर रूप से घायल पाया गया। पशु चिकित्सा केंद्र पर चिकित्सकों के अनुपस्थित रहने और समय पर इलाज न मिलने के कारण हिरन की मौत हो गई।
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के जरवल क्षेत्र में एक नर हिरन को भारत गैस एजेंसी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग से पार करते समय अज्ञात वाहन से टकराकर गंभीर रूप से घायल पाया गया। घटना की सूचना मिलने पर वरिष्ठ पत्रकार पंडित अशोक मिश्रा (अन्ना भैया) ने तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचित किया। इसके बाद जरवल के चौकी इंचार्ज राकेश कुमार पांडेय, मुलायम सिंह यादव दीवान और माता प्रसाद मिश्रा दीवान घटनास्थल पर पहुंचे।
घटनास्थल पर पहुंचने पर देखा गया कि घायल नर हिरन गहरे पानी में तड़प रहा था। चौकी इंचार्ज राकेश कुमार पांडेय, मुलायम सिंह यादव दीवान और आम जनता ने मिलकर गहरे पानी में उतरकर घायल हिरन को बाहर निकाला। इसके बाद चौकी इंचार्ज ने हिरन को इलाज के लिए बैटरी रिक्शा के जरिए जरवल पशु चिकित्सा केंद्र पहुंचाया।
हालांकि, जब घायल हिरन को चिकित्सा केंद्र पहुंचाया गया, तो वहां ताला लगा हुआ था और कोई भी चिकित्सक या कर्मी मौजूद नहीं था। लगभग 10 से 15 मिनट तक घायल हिरन के तड़पने के बाद उसकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती, तो शायद इसकी जान बचाई जा सकती थी।
घटना की प्रथम सूचना वन दरोगा शीतला प्रसाद को दी गई, जिनके निर्देश पर वन रक्षक सज्जाद अहमद मौके पर पहुंचे। उन्होंने हिरन का शव अपने कब्जे में लेकर अन्य कार्रवाई के लिए वन केंद्र के लिए रवाना कर दिया। वरिष्ठ पत्रकार पंडित अशोक मिश्रा ने इस घटना पर गहरा दुख और अफसोस जताया, उन्होंने कहा कि चौकी इंचार्ज की कोशिशों के बावजूद चिकित्सा केंद्र की लापरवाही के कारण हिरन की जान नहीं बचाई जा सकी।
घटनास्थल पर पहुंचने पर देखा गया कि घायल नर हिरन गहरे पानी में तड़प रहा था। चौकी इंचार्ज राकेश कुमार पांडेय, मुलायम सिंह यादव दीवान और आम जनता ने मिलकर गहरे पानी में उतरकर घायल हिरन को बाहर निकाला। इसके बाद चौकी इंचार्ज ने हिरन को इलाज के लिए बैटरी रिक्शा के जरिए जरवल पशु चिकित्सा केंद्र पहुंचाया।
हालांकि, जब घायल हिरन को चिकित्सा केंद्र पहुंचाया गया, तो वहां ताला लगा हुआ था और कोई भी चिकित्सक या कर्मी मौजूद नहीं था। लगभग 10 से 15 मिनट तक घायल हिरन के तड़पने के बाद उसकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती, तो शायद इसकी जान बचाई जा सकती थी।
घटना की प्रथम सूचना वन दरोगा शीतला प्रसाद को दी गई, जिनके निर्देश पर वन रक्षक सज्जाद अहमद मौके पर पहुंचे। उन्होंने हिरन का शव अपने कब्जे में लेकर अन्य कार्रवाई के लिए वन केंद्र के लिए रवाना कर दिया। वरिष्ठ पत्रकार पंडित अशोक मिश्रा ने इस घटना पर गहरा दुख और अफसोस जताया, उन्होंने कहा कि चौकी इंचार्ज की कोशिशों के बावजूद चिकित्सा केंद्र की लापरवाही के कारण हिरन की जान नहीं बचाई जा सकी।