राजनीति
बिहार में जमीन के दाखिल-खारिज के लिए अब केवल कोर्ट में आवेदन से नहीं रुकेगा प्रक्रिया, CO को जारी हुआ नया निर्देश
बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अंचल कार्यालयों को निर्देश दिया है कि जमीन के दाखिल-खारिज के मामले को केवल अदालत में दायर आवेदन या आपत्ति के आधार पर लंबित नहीं माना जाएगा। अब सक्षम न्यायालय में विधिवत दायर मुकदमे की स्वीकारोक्ति (Admission) का स्पष्ट प्रमाण अनिवार्य होगा।
बिहार में जमीन के दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व संबंधी मामलों की प्रक्रिया को अब केवल इस आधार पर अंचल कार्यालय में रोका नहीं जा सकेगा कि किसी ने अदालत में आवेदन, आपत्ति या अभ्यावेदन दर्ज कर रखा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट किया है कि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6(12) के तहत केवल उसी मामले को लंबित माना जाएगा, जिसके लिए सक्षम न्यायालय में विधिवत मुकदमा दायर हुआ हो और उसकी स्वीकारोक्ति (Admission) का स्पष्ट प्रमाण मौजूद हो।
विभाग ने सभी अंचल अधिकारियों (CO) को एक समान दिशा-निर्देश जारी किया है, जिसमें दीवानी या व्यवहार न्यायालय, पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को सक्षम न्यायालय माना गया है। निर्देश के अनुसार, मुकदमे की प्रमाणित प्रति में एडमिशन स्पष्ट रूप से दर्ज होना अनिवार्य है। केवल आवेदन या आपत्ति लंबित होने से यह माना नहीं जाएगा कि जमीन का मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके अलावा, अस्थायी या स्थायी निषेधाज्ञा और यथास्थिति (Status Quo) जैसे आदेशों को भी निर्धारित शर्तों के अनुसार ही देखा जाएगा।
इस नए निर्देश के साथ ही विभाग ने 2 फरवरी 2026 और 11 सितंबर 2026 को जारी किए गए पुराने निर्देशों को निरस्त कर दिया है। नए नियमों के तहत अंचल अधिकारियों को दाखिल-खारिज समेत अन्य राजस्व मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखने और उन्हें समय पर निष्पादित करने का निर्देश दिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में मुकदमा चलने के बहाने अंचल कार्यालयों में अटके हुए मामलों की देरी को दूर करना है और प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करना है।
विभाग ने सभी अंचल अधिकारियों (CO) को एक समान दिशा-निर्देश जारी किया है, जिसमें दीवानी या व्यवहार न्यायालय, पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को सक्षम न्यायालय माना गया है। निर्देश के अनुसार, मुकदमे की प्रमाणित प्रति में एडमिशन स्पष्ट रूप से दर्ज होना अनिवार्य है। केवल आवेदन या आपत्ति लंबित होने से यह माना नहीं जाएगा कि जमीन का मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके अलावा, अस्थायी या स्थायी निषेधाज्ञा और यथास्थिति (Status Quo) जैसे आदेशों को भी निर्धारित शर्तों के अनुसार ही देखा जाएगा।
इस नए निर्देश के साथ ही विभाग ने 2 फरवरी 2026 और 11 सितंबर 2026 को जारी किए गए पुराने निर्देशों को निरस्त कर दिया है। नए नियमों के तहत अंचल अधिकारियों को दाखिल-खारिज समेत अन्य राजस्व मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखने और उन्हें समय पर निष्पादित करने का निर्देश दिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में मुकदमा चलने के बहाने अंचल कार्यालयों में अटके हुए मामलों की देरी को दूर करना है और प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करना है।