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20 अक्टू. 2026•
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राजनीति

बिहार की राजनीति में आनंद मोहन ने उठाए सवाल: आठ सीटों पर राजपूतों को टिकट क्यों नहीं, अनंत सिंह प्रकरण पर भी की टिप्पणी

✍️ रिपोर्टर: Manoj Kunwar 🗓 20 अक्टू. 2026, 09:05 AM 👁 12
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पूर्व सांसद आनंद मोहन ने एनडीए में राजपूत समाज के प्रतिनिधित्व, जेडीयू नेतृत्व की भूमिका और अनंत सिंह प्रकरण पर नेताओं की चुप्पी को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण और सत्ता में हिस्सेदारी के मुद्दों पर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने एक बार फिर चर्चा में आकर कई अहम सवाल खड़े किए हैं। अपने बेबाक अंदाज और तल्ख टिप्पणियों के लिए जाने जाने वाले आनंद मोहन ने एनडीए गठबंधन में राजपूत समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर गहरे सवाल उठाए हैं। मुख्य सवाल यह है कि आखिर आठ सीटों पर एनडीए ने राजपूत समाज से किसी उम्मीदवार को टिकट क्यों नहीं दिया। क्या यह केवल चुनावी समीकरणों का मामला है या फिर समाज के भीतर बढ़ती बेचैनी का संकेत, यह सवाल अब राजनीतिक गलियारों में गूँज रहा है।

बातचीत में जेडीयू नेतृत्व की भूमिका और राजनीतिक निष्ठा पर भी सवाल उठाए गए। आनंद मोहन ने यह भी पूछा कि जब वे जेडीयू नेतृत्व पर सवाल उठा रहे थे, तब उनके ही समाज के जेडीयू नेताओं ने उन पर हमला क्यों बोला। इसके अलावा, अनंत सिंह प्रकरण पर कई नेताओं की चुप्पी को लेकर भी सवाल खड़ा किया गया। क्या राजनीति में मुद्दों पर प्रतिक्रिया सुविधा और समीकरण देखकर तय होती है, यह प्रश्न अब सामने आया है।

उच्च सदन यानी विधान परिषद और राज्यसभा में राजपूतों की घटती मौजूदगी और तिरहुत-सारण सीट पर राजपूत उम्मीदवार की दावेदारी भी इस संवाद के केंद्र में रही। आनंद मोहन ने यह सवाल उठाया कि क्या यह केवल किसी एक उम्मीदवार की जीत-हार का प्रश्न है या समाज के राजनीतिक सम्मान से जुड़ा बड़ा मुद्दा। साथ ही, चुनावी राजनीति में धनबल बनाम जनबल की बहस को भी उन्होंने अपनी रणनीति के संदर्भ में उठाया।

इसके अलावा, बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह को आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से पांच करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस भेजे जाने के मुद्दे पर भी आनंद मोहन से उनकी राय जानी गई। इस प्रकरण में कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक जवाबदेही के सवाल उठाए गए। आनंद मोहन की यह बेबाक बातचीत बिहार की मौजूदा राजनीति, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक दलों को भेजे जा रहे संदेशों को समझने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है।
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