धर्म
बिहार के मधुबनी जिले में स्थित एकादश रुद्र महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध, पौराणिक और चमत्कारी धार्मिक स्थल है।
स्थान: यह मंदिर मधुबनी जिला मुख्यालय से लगभग 3 से 7 किलोमीटर की दूरी पर राजनगर प्रखंड के मंगरौनी गांव में स्थित है। स्थापना: इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1953 में प्रसिद्ध तांत्रिक प
बिहार के मधुबनी जिले में स्थित एकादश रुद्र महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध, पौराणिक और चमत्कारी धार्मिक स्थल है।
स्थान: यह मंदिर मधुबनी जिला मुख्यालय से लगभग 3 से 7 किलोमीटर की दूरी पर राजनगर प्रखंड के मंगरौनी गांव में स्थित है।
स्थापना: इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1953 में प्रसिद्ध तांत्रिक पंडित मुनीश्वर झा द्वारा की गई थी।
विशेषता: यहाँ एक ही शक्ति वेदी पर तांत्रिक विधि से भगवान शिव के ग्यारह (11) शिवलिंग स्थापित हैं। ये सभी एकादश स्वरूप काले ग्रेनाइट पत्थर से बने हैं, जो अपने आप में अनूठे हैं। ऐसा माना जाता है कि दुनिया में इस तरह का यह एक विशिष्ट मंदिर है।
विशेष मंत्र: इस स्थान के लिए विशेष मंत्र "ॐ नमः शिवाय, एकादश रुद्राय" माना गया है।
परिसर के अन्य आकर्षण:
मंदिर के सामने एक पवित्र सरोवर है जिसके तट पर विष्णु पद गया क्षेत्र भी है, जहाँ लोग अपने पितरों की शांति और पिंडदान के लिए आते हैं।
परिसर में रा-कृष्ण मंदिर, महाकाल मंदिर, माता काली और राज-राजेश्वरी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
यहाँ सुबह वैदिक विधि और शाम को तांत्रिक पद्धति से पूजा-अर्चना की जाती है।
स्थान: यह मंदिर मधुबनी जिला मुख्यालय से लगभग 3 से 7 किलोमीटर की दूरी पर राजनगर प्रखंड के मंगरौनी गांव में स्थित है।
स्थापना: इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1953 में प्रसिद्ध तांत्रिक पंडित मुनीश्वर झा द्वारा की गई थी।
विशेषता: यहाँ एक ही शक्ति वेदी पर तांत्रिक विधि से भगवान शिव के ग्यारह (11) शिवलिंग स्थापित हैं। ये सभी एकादश स्वरूप काले ग्रेनाइट पत्थर से बने हैं, जो अपने आप में अनूठे हैं। ऐसा माना जाता है कि दुनिया में इस तरह का यह एक विशिष्ट मंदिर है।
विशेष मंत्र: इस स्थान के लिए विशेष मंत्र "ॐ नमः शिवाय, एकादश रुद्राय" माना गया है।
परिसर के अन्य आकर्षण:
मंदिर के सामने एक पवित्र सरोवर है जिसके तट पर विष्णु पद गया क्षेत्र भी है, जहाँ लोग अपने पितरों की शांति और पिंडदान के लिए आते हैं।
परिसर में रा-कृष्ण मंदिर, महाकाल मंदिर, माता काली और राज-राजेश्वरी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
यहाँ सुबह वैदिक विधि और शाम को तांत्रिक पद्धति से पूजा-अर्चना की जाती है।