Agriculture
भिण्ड में पराली जलाने पर प्रतिबंध के बावजूद किसान ने खेत में लगाई आग, कृषि विभाग ने बनाया पंचनामा
कलेक्टर भिण्ड के प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद गोहद विकासखंड के दो गांवों में किसानों द्वारा पराली जलाई गई। कृषि विभाग के दल ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा बनाया और किसानों को समझाया।
कलेक्टर भिण्ड श्री पवन जैन द्वारा जिले में पराली जलाने पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जाने और कृषि विभाग द्वारा किसानों को निरंतर समझाइश देने के बावजूद इसकी उल्लंघन की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में आज विकासखंड गोहद के ग्राम चक खनेता और इकहरा में एक किसान ने अपनी खेत में फसल अवशेषों (पराली) में आग लगा दी। सूचना मिलते ही कृषि विभाग का दल और संबंधित पटवारी तत्काल मौके पर पहुंचे। दल ने स्थिति का निरीक्षण किया, किसान को पराली जलाने के दुष्परिणामों के बारे में समझाया और नियमानुसार कार्यवाही के लिए घटनास्थल का पंचनामा तैयार किया गया।
कृषि विभाग ने किसानों को स्पष्ट किया कि पराली जलाने से मिट्टी में उपलब्ध जैविक पदार्थ और लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति और पोषक तत्वों की हानि होती है। इसके अलावा, आग से आसपास की खड़ी फसलों, पेड़-पौधों और जनसंपत्ति को नुकसान पहुंचने, वायु प्रदूषण बढ़ने और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है।
उप संचालक कृषि श्री राम सुजान शर्मा ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे कलेक्टर भिण्ड के आदेशों का पूर्ण पालन करें और किसी भी स्थिति में खेतों में पराली न जलाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि पराली का उपयोग जैविक खाद बनाने और मिट्टी में मिलाने के लिए किया जाए। इसके लिए स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस), स्ट्रॉ रीपर और अन्य कृषि यंत्रों का उपयोग किया जा सकता है।
कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि खेत में आग लगाना न केवल मौजूदा पराली को जलाता है, बल्कि आने वाली फसल की उर्वरा शक्ति और भूमि की सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है। यदि प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक और वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। विभाग की अपील है कि किसान पराली न जलाएं, खेत की उर्वरा शक्ति बचाएं, पर्यावरण को सुरक्षित रखें और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ धरती का संरक्षण करें।
कृषि विभाग ने किसानों को स्पष्ट किया कि पराली जलाने से मिट्टी में उपलब्ध जैविक पदार्थ और लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति और पोषक तत्वों की हानि होती है। इसके अलावा, आग से आसपास की खड़ी फसलों, पेड़-पौधों और जनसंपत्ति को नुकसान पहुंचने, वायु प्रदूषण बढ़ने और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है।
उप संचालक कृषि श्री राम सुजान शर्मा ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे कलेक्टर भिण्ड के आदेशों का पूर्ण पालन करें और किसी भी स्थिति में खेतों में पराली न जलाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि पराली का उपयोग जैविक खाद बनाने और मिट्टी में मिलाने के लिए किया जाए। इसके लिए स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस), स्ट्रॉ रीपर और अन्य कृषि यंत्रों का उपयोग किया जा सकता है।
कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि खेत में आग लगाना न केवल मौजूदा पराली को जलाता है, बल्कि आने वाली फसल की उर्वरा शक्ति और भूमि की सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है। यदि प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक और वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। विभाग की अपील है कि किसान पराली न जलाएं, खेत की उर्वरा शक्ति बचाएं, पर्यावरण को सुरक्षित रखें और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ धरती का संरक्षण करें।