स्थानीय
भागलपुर में विजयादशमी के पूर्व प्रतिमा विसर्जन पर सिंदूर खेला और नृत्य की रस्में
भागलपुर में विजयादशमी के अवसर पर प्रतिमा विसर्जन से पहले बंगाली समुदाय और स्थानीय महिलाओं ने सिंदूर खेला और पारंपरिक नृत्य की रस्में उल्लासपूर्वक मनाई।
भागलपुर में विजयादशमी के अवसर पर प्रतिमा विसर्जन से ठीक पहले बंगाली समुदाय और स्थानीय महिलाओं ने सिंदूर खेला और पारंपरिक नृत्य की रस्में मनाई।
सिंदूर खेला की रस्म में महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं, पान और मिठाई का भोग लगाती हैं, और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य और सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
इस अवसर पर पंडालों और मंदिरों में शंखनाद, उलू ध्वनि तथा ढोल-ढाक की थाप गूंजती है। महिलाएं मां की विदाई के समय और सिंदूर खेला के दौरान पारंपरिक गीतों पर झूमे और नाचे।
भागलपुर के ऐतिहासिक दुर्गाबाड़ी, कालीबाड़ी, सरकारबाड़ी, रायबाड़ी, महाशय ड्योढ़ी, नाथनगर और रिफ्यूजी कॉलोनी समेत विभिन्न पूजा पंडालों में यह उत्सव बड़े पैमाने पर मनाया गया। सिंदूर खेला संपन्न होने के बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं को गाजे-बाजे और नम आंखों के साथ गंगा घाटों की ओर विसर्जन शोभायात्रा के लिए विदा किया गया।
सिंदूर खेला की रस्म में महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं, पान और मिठाई का भोग लगाती हैं, और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य और सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
इस अवसर पर पंडालों और मंदिरों में शंखनाद, उलू ध्वनि तथा ढोल-ढाक की थाप गूंजती है। महिलाएं मां की विदाई के समय और सिंदूर खेला के दौरान पारंपरिक गीतों पर झूमे और नाचे।
भागलपुर के ऐतिहासिक दुर्गाबाड़ी, कालीबाड़ी, सरकारबाड़ी, रायबाड़ी, महाशय ड्योढ़ी, नाथनगर और रिफ्यूजी कॉलोनी समेत विभिन्न पूजा पंडालों में यह उत्सव बड़े पैमाने पर मनाया गया। सिंदूर खेला संपन्न होने के बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं को गाजे-बाजे और नम आंखों के साथ गंगा घाटों की ओर विसर्जन शोभायात्रा के लिए विदा किया गया।