बच्चों की थाली से कौन छीन रहा निवाला?
बच्चों की थाली से कौन छीन रहा निवाला?
बरतर छात्रावास में अव्यवस्थाओं के आरोप, अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
केशवाही। बरतर स्थित छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतकर्ता ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर आरोप लगाया है कि नए अधीक्षक के आने के बाद से छात्रावास में रात के समय सभी बच्चे नियमित रूप से नहीं रहते हैं। इसके अलावा बच्चों को गुणवत्ताहीन भोजन दिए जाने और नाश्ता नहीं मिलने की शिकायत भी सामने आई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि छात्रावास में बच्चों के लिए शासन द्वारा निर्धारित व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता की निगरानी ठीक ढंग से नहीं हो रही है। आरोप है कि जिम्मेदारों की कथित मनमानी के कारण बच्चों को निर्धारित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यदि शिकायतों में सच्चाई है तो यह बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों से जुड़ा गंभीर विषय है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि छात्रावास में सभी बच्चों के रहने की व्यवस्था और भोजन की नियमित व्यवस्था शासन के नियमों के अनुसार है, तो रात के समय छात्रावास में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन क्यों नहीं किया जा रहा है? भोजन की गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा है और बच्चों को निर्धारित नाश्ता एवं भोजन मिल रहा है या नहीं, इसकी निगरानी किस स्तर पर हो रही है?
शिकायतकर्ता ने बीईओ दीपक निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिर ऐसी शिकायतों के बावजूद संबंधित अधीक्षक को प्रभार में क्यों रखा गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में विभाग को छात्रावास की अचानक जांच, रात के समय विद्यार्थियों की उपस्थिति का सत्यापन, भोजन की गुणवत्ता एवं मेन्यू की जांच तथा बच्चों और उनके अभिभावकों से अलग-अलग जानकारी लेने की जरूरत है। जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना यह है कि बरतर छात्रावास की शिकायतों पर विभाग कब जांच कराता है और बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित सुविधाएं एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना सुनिश्चित करता है।
बरतर छात्रावास में अव्यवस्थाओं के आरोप, अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
केशवाही। बरतर स्थित छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतकर्ता ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर आरोप लगाया है कि नए अधीक्षक के आने के बाद से छात्रावास में रात के समय सभी बच्चे नियमित रूप से नहीं रहते हैं। इसके अलावा बच्चों को गुणवत्ताहीन भोजन दिए जाने और नाश्ता नहीं मिलने की शिकायत भी सामने आई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि छात्रावास में बच्चों के लिए शासन द्वारा निर्धारित व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता की निगरानी ठीक ढंग से नहीं हो रही है। आरोप है कि जिम्मेदारों की कथित मनमानी के कारण बच्चों को निर्धारित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यदि शिकायतों में सच्चाई है तो यह बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों से जुड़ा गंभीर विषय है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि छात्रावास में सभी बच्चों के रहने की व्यवस्था और भोजन की नियमित व्यवस्था शासन के नियमों के अनुसार है, तो रात के समय छात्रावास में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन क्यों नहीं किया जा रहा है? भोजन की गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा है और बच्चों को निर्धारित नाश्ता एवं भोजन मिल रहा है या नहीं, इसकी निगरानी किस स्तर पर हो रही है?
शिकायतकर्ता ने बीईओ दीपक निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिर ऐसी शिकायतों के बावजूद संबंधित अधीक्षक को प्रभार में क्यों रखा गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में विभाग को छात्रावास की अचानक जांच, रात के समय विद्यार्थियों की उपस्थिति का सत्यापन, भोजन की गुणवत्ता एवं मेन्यू की जांच तथा बच्चों और उनके अभिभावकों से अलग-अलग जानकारी लेने की जरूरत है। जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना यह है कि बरतर छात्रावास की शिकायतों पर विभाग कब जांच कराता है और बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित सुविधाएं एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना सुनिश्चित करता है।