📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhrasingh
बिज़नेस
बैंकों और नियामकों ने ब्लॉकचेन को वित्तीय बाजार की नई परत माना
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🗓 01 सित. 2026, 08:44 AM
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बैंक और भारतीय नियामक अब ब्लॉकचेन को वित्तीय बाजार को आधुनिकीकरण के लिए आधारभूत परत मान रहे हैं, जो पहले केवल क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा था।
टोकनाइज़ेशन, जो पहले केवल क्रिप्टोकरेंसी के संदर्भ में चर्चा होता था, अब मुख्यधारा के वित्तीय संस्थानों में लोकप्रिय हो रहा है। प्रमुख भारतीय बैंकों के हालिया बयानों से पता चलता है कि वे परिसंपत्तियों को डिजिटल रूप में दर्शाने के लिए ब्लॉकचेन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे तरलता और निपटान गति में सुधार की उम्मीद है।
भारतीय रिज़र्व बैंक सहित नियामक संस्थाएँ ब्लॉकचेन‑आधारित प्रतिभूतियों और अन्य टोकनाइज़्ड उपकरणों को समायोजित करने के लिए ढाँचे तैयार कर रही हैं। अधिकारी निवेशक संरक्षण, बाजार की अखंडता और एंटी‑मनी लॉन्ड्रिंग अनुपालन जैसे मुद्दों को सुलझाने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों की आवश्यकता पर ज़ोर दे रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ब्लॉकचेन परत बैक‑ऑफ़िस प्रक्रियाओं को सरल बना सकती है, मिलान लागत घटा सकती है और पारंपरिक रूप से कम तरल परिसंपत्तियों के अंशीय स्वामित्व को संभव बना सकती है। जबकि तकनीक दक्षता का वादा करती है, विशेषज्ञ व्यापक अपनाने से पहले मजबूत कानूनी और तकनीकी मानकों की आवश्यकता पर चेतावनी देते हैं।
टोकनाइज़ेशन पर बढ़ता ध्यान भारत के वित्तीय बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने की व्यापक आकांक्षा को दर्शाता है, जो वैश्विक रुझानों के साथ तालमेल बिठाते हुए नियामक निगरानी को बनाए रखता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक सहित नियामक संस्थाएँ ब्लॉकचेन‑आधारित प्रतिभूतियों और अन्य टोकनाइज़्ड उपकरणों को समायोजित करने के लिए ढाँचे तैयार कर रही हैं। अधिकारी निवेशक संरक्षण, बाजार की अखंडता और एंटी‑मनी लॉन्ड्रिंग अनुपालन जैसे मुद्दों को सुलझाने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों की आवश्यकता पर ज़ोर दे रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ब्लॉकचेन परत बैक‑ऑफ़िस प्रक्रियाओं को सरल बना सकती है, मिलान लागत घटा सकती है और पारंपरिक रूप से कम तरल परिसंपत्तियों के अंशीय स्वामित्व को संभव बना सकती है। जबकि तकनीक दक्षता का वादा करती है, विशेषज्ञ व्यापक अपनाने से पहले मजबूत कानूनी और तकनीकी मानकों की आवश्यकता पर चेतावनी देते हैं।
टोकनाइज़ेशन पर बढ़ता ध्यान भारत के वित्तीय बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने की व्यापक आकांक्षा को दर्शाता है, जो वैश्विक रुझानों के साथ तालमेल बिठाते हुए नियामक निगरानी को बनाए रखता है।