📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Serine Ben Brahim
अपराध
जमानत का मतलब बरी नहीं, कहते हैं मल्होत्रा
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 03 सित. 2026, 07:18 PM
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सीनियर विधिक विशेषज्ञ मल्होत्रा ने कहा, जमानत मिलने से अपराध से बरी होने का प्रमाण नहीं मिलता।
दिल्ली – वरिष्ठ विधिक टिप्पणीकार मल्होत्रा ने हाल ही में स्पष्ट किया कि जमानत का आदेश बरी होने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जमानत एक प्रक्रिया‑संबंधी अधिकार है, जो मुकदमे के दौरान आरोपी को आज़ादी देता है, लेकिन आरोप की वैधता पर कोई फैसला नहीं करता।
यह टिप्पणी राजधानी में चल रही कई हाई‑प्रोफ़ाइल जमानत मामलों के बीच आई, जहाँ न्यायालयों पर न्यायिक दक्षता और सार्वजनिक धारणा के बीच संतुलन बनाने का दबाव है। मल्होत्रा ने चेतावनी दी कि जमानत को बरी होने के बराबर समझना मीडिया और जनता को गुमराह कर सकता है, जिससे न्याय प्रणाली में भरोसा कम हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस बात पर जोर दिया कि जमानत केवल आरोपी की सुनवाई में हाज़िरी सुनिश्चित करती है और साक्ष्य भार को नहीं बदलती। यह स्पष्टीकरण यह रेखांकित करने के लिए दिया गया है कि दोषी या निरपराध का निर्धारण केवल पूर्ण मुकदमे और न्यायिक निर्णय के बाद ही होगा।
यह टिप्पणी राजधानी में चल रही कई हाई‑प्रोफ़ाइल जमानत मामलों के बीच आई, जहाँ न्यायालयों पर न्यायिक दक्षता और सार्वजनिक धारणा के बीच संतुलन बनाने का दबाव है। मल्होत्रा ने चेतावनी दी कि जमानत को बरी होने के बराबर समझना मीडिया और जनता को गुमराह कर सकता है, जिससे न्याय प्रणाली में भरोसा कम हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस बात पर जोर दिया कि जमानत केवल आरोपी की सुनवाई में हाज़िरी सुनिश्चित करती है और साक्ष्य भार को नहीं बदलती। यह स्पष्टीकरण यह रेखांकित करने के लिए दिया गया है कि दोषी या निरपराध का निर्धारण केवल पूर्ण मुकदमे और न्यायिक निर्णय के बाद ही होगा।