📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anchal lilhare
धर्म
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार
✍️ Amar Ujala · Ujjain
🗓 18 अक्टू. 2026, 08:15 AM
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रविवार सुबह उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को भांग, चांदी का मुकुट और मुंडी माला से सजाया गया।
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर ने रविवार सुबह 4 बजे अपने द्वार खोले और अश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को भस्म आरती का आयोजन किया। भक्तजन प्रातःकाल ही एकत्र हुए ताकि इस पवित्र अनुष्ठान को देख सकें, जिसे शैव परम्परा में अत्यंत शुभ माना जाता है।
आरती से पहले पंचामृत अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, शहद, घी और शर्करा का मिश्रण लिंग पर चढ़ाया गया। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल को विशेष श्रृंगार दिया गया: भांग का लेप लगाया गया, चांदी का मुकुट सिर पर रखा गया और पारंपरिक मुंडी माला गले में पहना गया।
भांग का प्रयोग, चांदी का मुकुट और मुंडी माला का सजावट इस विशेष तिथि के लिए आरक्षित है और भक्तों के लिए आशीर्वाद का स्रोत माना जाता है। यह अनुष्ठान मंदिर की प्राचीन परम्पराओं को बनाए रखने और व्यापक जनसमुदाय को आकर्षित करने का प्रतीक है।
प्रभारी अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हुआ और मंदिर प्रबंधन ने कहा कि यह श्रृंगार अवधि के दौरान जारी रहेगा, जिससे राज्य भर के तीर्थयात्री इस आध्यात्मिक अनुभव का लाभ उठा सकेंगे।
आरती से पहले पंचामृत अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, शहद, घी और शर्करा का मिश्रण लिंग पर चढ़ाया गया। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल को विशेष श्रृंगार दिया गया: भांग का लेप लगाया गया, चांदी का मुकुट सिर पर रखा गया और पारंपरिक मुंडी माला गले में पहना गया।
भांग का प्रयोग, चांदी का मुकुट और मुंडी माला का सजावट इस विशेष तिथि के लिए आरक्षित है और भक्तों के लिए आशीर्वाद का स्रोत माना जाता है। यह अनुष्ठान मंदिर की प्राचीन परम्पराओं को बनाए रखने और व्यापक जनसमुदाय को आकर्षित करने का प्रतीक है।
प्रभारी अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हुआ और मंदिर प्रबंधन ने कहा कि यह श्रृंगार अवधि के दौरान जारी रहेगा, जिससे राज्य भर के तीर्थयात्री इस आध्यात्मिक अनुभव का लाभ उठा सकेंगे।