📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rohit Sharma
राजनीति
अरुणाचल प्रदेश और असम ने लोअर डिबांग‑टिन्सुकिया सीमा विवाद पर बातचीत फिर शुरू की
✍️ India Today
🗓 02 नव. 2026, 06:16 PM
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अरुणाचल प्रदेश और असम की सरकारों ने लोअर डिबांग‑टिन्सुकिया सीमा विवाद को सुलझाने के लिए फिर से बातचीत करने का समझौता किया है।
अरुणाचल प्रदेश और असम ने लोअर डिबांग‑टिन्सुकिया सीमा विवाद को सुलझाने के लिए फिर से बातचीत शुरू करने की औपचारिक घोषणा की है, जो दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चल रहा मुद्दा है। यह कदम पिछले वर्ष ठप पड़े वार्तालापों की पुनः समीक्षा के बाद उठाया गया।
नवीनीकृत संवाद का मुख्य केंद्र बिंदु लोअर डिबांग घाटी (अरुणाचल प्रदेश) और असम के टिन्सुकिया जिले के बीच विवादित सीमा रेखा का निर्धारण होगा। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने कहा है कि पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान प्रशासनिक टकराव को रोकने और सीमा क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को सुगम बनाने के लिये आवश्यक है।
राज्य प्रतिनिधियों के बीच निकट भविष्य में कई बैठकें होने की संभावना है, जिसमें सर्वेक्षण डेटा, ऐतिहासिक दस्तावेज़ और प्राकृतिक संसाधनों के संयुक्त प्रबंधन के प्रस्तावों का आदान‑प्रदान शामिल होगा। इस प्रक्रिया को स्थानीय समुदायों ने बारीकी से देखा है, क्योंकि सीमा की अस्पष्टता उनका दैनिक जीवन प्रभावित करती है।
सफलता मिलने पर यह समझौता उत्तरपूर्व में अन्य राज्यीय सीमा विवादों के समाधान के लिये एक मॉडल स्थापित कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता में वृद्धि होगी।
नवीनीकृत संवाद का मुख्य केंद्र बिंदु लोअर डिबांग घाटी (अरुणाचल प्रदेश) और असम के टिन्सुकिया जिले के बीच विवादित सीमा रेखा का निर्धारण होगा। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने कहा है कि पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान प्रशासनिक टकराव को रोकने और सीमा क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को सुगम बनाने के लिये आवश्यक है।
राज्य प्रतिनिधियों के बीच निकट भविष्य में कई बैठकें होने की संभावना है, जिसमें सर्वेक्षण डेटा, ऐतिहासिक दस्तावेज़ और प्राकृतिक संसाधनों के संयुक्त प्रबंधन के प्रस्तावों का आदान‑प्रदान शामिल होगा। इस प्रक्रिया को स्थानीय समुदायों ने बारीकी से देखा है, क्योंकि सीमा की अस्पष्टता उनका दैनिक जीवन प्रभावित करती है।
सफलता मिलने पर यह समझौता उत्तरपूर्व में अन्य राज्यीय सीमा विवादों के समाधान के लिये एक मॉडल स्थापित कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता में वृद्धि होगी।