📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gurtej Chauhan
वायरल
अरुणाचल के बच्चों ने ओणम पर मलयालम गानों पर धूम, वायरल वीडियो के ‘90 के बच्चे’ की खोज
✍️ Kerala Kaumudi
🗓 03 सित. 2026, 12:18 PM
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अरुणाचल प्रदेश के बच्चों ने ओणम के अवसर पर मलयालम हिट गानों पर नाचते हुए एक वीडियो बनाया, जिससे सोशल मीडिया पर 1990 के दशक के उस बच्चे की पहचान खोजी जा रही है।
अरुणाचल प्रदेश के स्कूल‑उम्र के बच्चों को ओणम के अवसर पर मलयालम के लोकप्रिय गानों पर नाचते हुए दिखाने वाला एक छोटा वीडियो भारतीय सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस क्लिप में बच्चों की ऊर्जा और पारम्परिक पोशाकें दिखती हैं, जो उत्तर‑पूर्व और केरल के बीच बढ़ती सांस्कृतिक आदान‑प्रदान को दर्शाती हैं।
नेटिज़ ने तुरंत पहचान ली कि इन गानों में क्लासिक मलयालम हिट्स हैं, जो आमतौर पर ओणम के साथ जुड़े होते हैं। जबकि बच्चों की उत्सुकता की सराहना की गई, दर्शकों ने नोट किया कि वीडियो में एक वॉटरमार्क है, जो दर्शाता है कि यह फुटेज 1990 के दशक में एक अज्ञात किशोर द्वारा रिकॉर्ड किया गया था।
'90 के बच्चे' की पहचान के रहस्य ने ऑनलाइन पूछताछ की लहर शुरू कर दी है; उपयोगकर्ता इस क्लिप को साझा कर रहे हैं और किसी भी जानकारी की तलाश कर रहे हैं जो मूल फिल्म निर्माता तक पहुंचा सके। स्थानीय मीडिया ने बताया कि यह वीडियो एक क्षेत्रीय फेसबुक पेज पर अपलोड होने के बाद फिर से उभरा, जो सांस्कृतिक कहानियों को समर्पित है।
अरुणाचल प्रदेश की प्राधिकरणों से इस मामले में कोई औपचारिक जांच नहीं की गई है, क्योंकि सामग्री को एक निरपराध सांस्कृतिक प्रस्तुति माना गया है। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म कैसे पुरानी यादों को फिर से जीवंत कर सकते हैं और राज्य‑स्तर पर सांस्कृतिक सराहना को बढ़ावा दे सकते हैं।
वीडियो अभी भी व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है, और टिप्पणीकारों ने उत्तर‑पूर्व के युवा संस्कृति और केरल के ओणम परंपराओं के मिश्रण की प्रशंसा की है, जबकि मूल निर्माता की खोज जारी है।
नेटिज़ ने तुरंत पहचान ली कि इन गानों में क्लासिक मलयालम हिट्स हैं, जो आमतौर पर ओणम के साथ जुड़े होते हैं। जबकि बच्चों की उत्सुकता की सराहना की गई, दर्शकों ने नोट किया कि वीडियो में एक वॉटरमार्क है, जो दर्शाता है कि यह फुटेज 1990 के दशक में एक अज्ञात किशोर द्वारा रिकॉर्ड किया गया था।
'90 के बच्चे' की पहचान के रहस्य ने ऑनलाइन पूछताछ की लहर शुरू कर दी है; उपयोगकर्ता इस क्लिप को साझा कर रहे हैं और किसी भी जानकारी की तलाश कर रहे हैं जो मूल फिल्म निर्माता तक पहुंचा सके। स्थानीय मीडिया ने बताया कि यह वीडियो एक क्षेत्रीय फेसबुक पेज पर अपलोड होने के बाद फिर से उभरा, जो सांस्कृतिक कहानियों को समर्पित है।
अरुणाचल प्रदेश की प्राधिकरणों से इस मामले में कोई औपचारिक जांच नहीं की गई है, क्योंकि सामग्री को एक निरपराध सांस्कृतिक प्रस्तुति माना गया है। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म कैसे पुरानी यादों को फिर से जीवंत कर सकते हैं और राज्य‑स्तर पर सांस्कृतिक सराहना को बढ़ावा दे सकते हैं।
वीडियो अभी भी व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है, और टिप्पणीकारों ने उत्तर‑पूर्व के युवा संस्कृति और केरल के ओणम परंपराओं के मिश्रण की प्रशंसा की है, जबकि मूल निर्माता की खोज जारी है।