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अररिया में ओडीएफ स्थिरता और जलवायु-संवेदी वाश पर कार्यशाला का आयोजन
अररिया में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) स्थिति की स्थिरता सुनिश्चित करना और जलवायु-संवेदी वाश तकनीकों को अपनाना था।
जिला पदाधिकारी, अररिया श्री विनोद दूहन के दिशा-निर्देशों के आलोक में, डीआरडीए सभागार अररिया में 'ओडीएफ स्थिरता एवं जलवायु-संवेदी वाश तकनीकी' विषय पर एक जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ उप विकास आयुक्त अररिया श्रीमती रोजी कुमारी और निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण अररिया द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। यह कार्यशाला डीआरडीए अररिया, यूनिसेफ और सहयोगी संस्था जीपीएसभीएस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी।
कार्यक्रम में यूनिसेफ के वाश अधिकारी श्री सुधाकर रेड्डी ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत जिले ने घरेलू शौचालयों की उपलब्धता और खुले में शौच से मुक्त स्थिति प्राप्त करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब इन उपलब्धियों को लंबे समय तक बनाए रखना, स्वच्छता परिसंपत्तियों का उचित रखरखाव सुनिश्चित करना और स्वच्छता सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अररिया जिला अक्सर बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित रहता है, जिससे पारंपरिक स्वच्छता प्रणालियों के समक्ष विभिन्न चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण इन जोखिमों में वृद्धि की संभावना को देखते हुए, जलवायु-संवेदी और आपदा-रोधी वाश तकनीकों को अपनाना आवश्यक हो गया है। कार्यशाला के दौरान ओडीएफ की अब तक की उपलब्धियों, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला में स्वच्छता अवसंरचना को जलवायु एवं आपदा जोखिमों के प्रति सक्षम बनाने, स्वच्छता परिसंपत्तियों के समयबद्ध रखरखाव, उपयुक्त तकनीकों के उपयोग तथा स्थानीय संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक उपायों की पहचान पर चर्चा हुई। यूनिसेफ के राज्य सलाहकार श्री निकेत झा ने सतत विकास लक्ष्य-6 (SDG-6) के अंतर्गत स्वच्छ जल एवं स्वच्छता संबंधी लक्ष्यों की प्राप्ति, जिले में ओडीएफ की स्थिरता को सुदृढ़ करने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति स्वच्छता प्रणालियों की अनुकूलन क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं टिकाऊ स्वच्छता सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
इस कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कनीय अभियंता, सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी, जिला समन्वयक एवं प्रखंड समन्वयक लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, जिला प्रबंधक एवं प्रखंड परियोजना प्रबंधक जीविका, सभी प्रखंडों से पंचायती राज संस्था पदाधिकारी, यूनिसेफ और जीपीएसभीएस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में यूनिसेफ के वाश अधिकारी श्री सुधाकर रेड्डी ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत जिले ने घरेलू शौचालयों की उपलब्धता और खुले में शौच से मुक्त स्थिति प्राप्त करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब इन उपलब्धियों को लंबे समय तक बनाए रखना, स्वच्छता परिसंपत्तियों का उचित रखरखाव सुनिश्चित करना और स्वच्छता सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अररिया जिला अक्सर बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित रहता है, जिससे पारंपरिक स्वच्छता प्रणालियों के समक्ष विभिन्न चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण इन जोखिमों में वृद्धि की संभावना को देखते हुए, जलवायु-संवेदी और आपदा-रोधी वाश तकनीकों को अपनाना आवश्यक हो गया है। कार्यशाला के दौरान ओडीएफ की अब तक की उपलब्धियों, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला में स्वच्छता अवसंरचना को जलवायु एवं आपदा जोखिमों के प्रति सक्षम बनाने, स्वच्छता परिसंपत्तियों के समयबद्ध रखरखाव, उपयुक्त तकनीकों के उपयोग तथा स्थानीय संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक उपायों की पहचान पर चर्चा हुई। यूनिसेफ के राज्य सलाहकार श्री निकेत झा ने सतत विकास लक्ष्य-6 (SDG-6) के अंतर्गत स्वच्छ जल एवं स्वच्छता संबंधी लक्ष्यों की प्राप्ति, जिले में ओडीएफ की स्थिरता को सुदृढ़ करने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति स्वच्छता प्रणालियों की अनुकूलन क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं टिकाऊ स्वच्छता सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
इस कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कनीय अभियंता, सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी, जिला समन्वयक एवं प्रखंड समन्वयक लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, जिला प्रबंधक एवं प्रखंड परियोजना प्रबंधक जीविका, सभी प्रखंडों से पंचायती राज संस्था पदाधिकारी, यूनिसेफ और जीपीएसभीएस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।