📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Post of India
स्वास्थ्य
आंध्र प्रदेश में 2026 में 65,000 नए कैंसर केस, ICMR‑NINE रिपोर्ट
✍️ The Times of India
🗓 29 सित. 2026, 04:02 AM
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान ने 2026 में आंध्र प्रदेश में 65,000 नए कैंसर मामलों की भविष्यवाणी की है, यह टाईम्स ऑफ इंडिया ने बताया।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (NINE) ने एक अनुमान जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि आंध्र प्रदेश में 2026 में लगभग 65,000 नए कैंसर केस दर्ज होंगे। यह अनुमान टाईम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में उजागर किया गया, जो राज्य के स्वास्थ्य परिदृश्य में बढ़ती चुनौती को दर्शाता है।
NINE ने जनसांख्यिकीय डेटा और रोग प्रवृत्ति का विश्लेषण करके यह भविष्यवाणी तैयार की है, जिससे प्रदेश में कैंसर की घटनाओं में निरंतर वृद्धि का संकेत मिलता है। रिपोर्ट में कैंसर के प्रकारों का विवरण नहीं दिया गया, पर यह संकेत देती है कि निदान, उपचार और रोकथाम के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है।
आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य प्राधिकरण इस अनुमान को संसाधन आवंटन, कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने और जन जागरूकता अभियानों को बढ़ाने के लिए उपयोग करने की संभावना है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर गैर‑संचारी रोगों के बढ़ते बोझ और स्वास्थ्य प्रणाली पर उनके दबाव के साथ भी मेल खाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम और प्रारंभिक पहचान के उपायों को सटीक रूप से लागू करने से अनुमानित बोझ को कम किया जा सकता है, परंतु इस बड़े पैमाने की भविष्यवाणी के लिए राज्य और केंद्र दोनों के स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
NINE ने जनसांख्यिकीय डेटा और रोग प्रवृत्ति का विश्लेषण करके यह भविष्यवाणी तैयार की है, जिससे प्रदेश में कैंसर की घटनाओं में निरंतर वृद्धि का संकेत मिलता है। रिपोर्ट में कैंसर के प्रकारों का विवरण नहीं दिया गया, पर यह संकेत देती है कि निदान, उपचार और रोकथाम के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है।
आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य प्राधिकरण इस अनुमान को संसाधन आवंटन, कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने और जन जागरूकता अभियानों को बढ़ाने के लिए उपयोग करने की संभावना है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर गैर‑संचारी रोगों के बढ़ते बोझ और स्वास्थ्य प्रणाली पर उनके दबाव के साथ भी मेल खाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम और प्रारंभिक पहचान के उपायों को सटीक रूप से लागू करने से अनुमानित बोझ को कम किया जा सकता है, परंतु इस बड़े पैमाने की भविष्यवाणी के लिए राज्य और केंद्र दोनों के स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।