📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ms Sarah Welch
बिज़नेस
छत्तीसगढ़ की 4000 साल पुरानी धातु‑लकड़ी विरासत को पीएम स्मृति वस्तुओं के नीलाम में
✍️ NE India Broadcast
🗓 08 अक्टू. 2026, 03:38 PM
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छत्तीसगढ़ के 4,000 साल पुराने धातु‑लकड़ी के विरासत वस्तुओं को प्रधानमंत्री स्मृति वस्तु के रूप में नीलाम करने की योजना है।
छत्तीसगढ़ के धातु‑लकड़ी से बने, लगभग चार हजार साल पुराने प्राचीन वस्तुओं का एक संग्रह प्रधानमंत्री स्मृति वस्तु के रूप में नीलाम किया जाएगा। विरासत विशेषज्ञों ने इन वस्तुओं को प्राचीन भारतीय शिल्पकला के दुर्लभ नमूने बताया है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं को दर्शाते हैं।
आयोजन समिति ने बताया कि यह नीलाम न केवल इन ऐतिहासिक वस्तुओं को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाएगा, बल्कि विरासत संरक्षण के लिए निधि भी जुटाएगा। संभावित खरीदारों में निजी संग्राहक, संग्रहालय और सांस्कृतिक संस्थान शामिल हैं, जो प्राचीन धातु‑लकड़ी शिल्प में रुचि रखते हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बिक्री में कोई राजनीतिक समर्थन नहीं है; वस्तुएँ केवल ऐतिहासिक स्मृति चिन्ह के रूप में प्रस्तुत की जा रही हैं। नीलाम की तिथि और बोली मंच की जानकारी जल्द ही जारी की जाएगी, और इच्छुक पक्षों को अग्रिम पंजीकरण करने की सलाह दी गई है।
यदि नीलाम नियोजित रूप से सम्पन्न होता है, तो प्राप्त धन छत्तीसगढ़ में संरक्षण परियोजनाओं के लिए उपयोग किया जाएगा, जिससे अन्य संकटग्रस्त वस्तुओं की सुरक्षा और राज्य की प्राचीन सामग्री संस्कृति पर शोध को बढ़ावा मिलेगा।
आयोजन समिति ने बताया कि यह नीलाम न केवल इन ऐतिहासिक वस्तुओं को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाएगा, बल्कि विरासत संरक्षण के लिए निधि भी जुटाएगा। संभावित खरीदारों में निजी संग्राहक, संग्रहालय और सांस्कृतिक संस्थान शामिल हैं, जो प्राचीन धातु‑लकड़ी शिल्प में रुचि रखते हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बिक्री में कोई राजनीतिक समर्थन नहीं है; वस्तुएँ केवल ऐतिहासिक स्मृति चिन्ह के रूप में प्रस्तुत की जा रही हैं। नीलाम की तिथि और बोली मंच की जानकारी जल्द ही जारी की जाएगी, और इच्छुक पक्षों को अग्रिम पंजीकरण करने की सलाह दी गई है।
यदि नीलाम नियोजित रूप से सम्पन्न होता है, तो प्राप्त धन छत्तीसगढ़ में संरक्षण परियोजनाओं के लिए उपयोग किया जाएगा, जिससे अन्य संकटग्रस्त वस्तुओं की सुरक्षा और राज्य की प्राचीन सामग्री संस्कृति पर शोध को बढ़ावा मिलेगा।