📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / करीर at hi.wikipedia
धर्म
सागर के 4,200 साल पुराने स्थल पर उभरा 1,700 साल पुराना कृष्ण कथा वाला शिलाफलक
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 04 सित. 2026, 08:02 AM
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मध्य प्रदेश के सागर में 1,700 साल पुराने गुप्त मंदिर के 26 शिलाफलक पर भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर उग्रसेन राज्याभिषेक तक की कथा उकेरी गई है।
सागर जिले के ऐरन क्षेत्र में काम कर रहे पुरातत्वविदों ने लगभग 1,700 साल पुराना एक गुप्त मंदिर खोजा, जिसमें 26 शिलाफलक पाए गए हैं। इन शिलाफलक पर भगवान कृष्ण के जन्म, बाल लीलाएँ, संदीपनि आश्रम, कंस वध और उग्रसेन के राज्याभिषेक जैसी घटनाओं को क्रमबद्ध रूप में उकेरा गया है।
यह खोज 4,200 साल पुरानी सभ्यता के अवशेषों के बीच मिली है, जो प्रागैतिहासिक बस्ती और मध्यकालीन धार्मिक अभिव्यक्ति के बीच एक दुर्लभ कालिक पुल बनाती है।
विद्वानों ने प्रत्येक पैनल का दस्तावेजीकरण किया है और शैलीगत समानता को एक ही कार्यशाला या संरक्षक परम्परा का संकेत माना है। साइट को अभी संरक्षण के तहत रखा गया है, और आगे के सर्वेक्षणों से मंदिर परिसर के विस्तार और शिलाफलक के संरक्षण की जरूरतों का आकलन किया जाएगा।
ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस खोज पर उत्साहित हैं, क्योंकि यह दृश्य कथा पुरानी ग्रंथों में वर्णित कृष्ण कथा को ठोस रूप में प्रस्तुत करती है। अधिकारियों ने इस स्थल को एक heritage site बनाने की योजना बनाई है, जिससे शैक्षणिक अध्ययन और सार्वजनिक पहुँच दोनों को संतुलित किया जा सके।
अब तक कोई ऐसी शिलालेख नहीं मिला है जो स्पष्ट तिथि या संरक्षक का उल्लेख करे, परन्तु चित्रांकन क्षेत्र के प्रारम्भिक मध्यकालीन कलात्मक मानकों के अनुरूप है।
यह खोज 4,200 साल पुरानी सभ्यता के अवशेषों के बीच मिली है, जो प्रागैतिहासिक बस्ती और मध्यकालीन धार्मिक अभिव्यक्ति के बीच एक दुर्लभ कालिक पुल बनाती है।
विद्वानों ने प्रत्येक पैनल का दस्तावेजीकरण किया है और शैलीगत समानता को एक ही कार्यशाला या संरक्षक परम्परा का संकेत माना है। साइट को अभी संरक्षण के तहत रखा गया है, और आगे के सर्वेक्षणों से मंदिर परिसर के विस्तार और शिलाफलक के संरक्षण की जरूरतों का आकलन किया जाएगा।
ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस खोज पर उत्साहित हैं, क्योंकि यह दृश्य कथा पुरानी ग्रंथों में वर्णित कृष्ण कथा को ठोस रूप में प्रस्तुत करती है। अधिकारियों ने इस स्थल को एक heritage site बनाने की योजना बनाई है, जिससे शैक्षणिक अध्ययन और सार्वजनिक पहुँच दोनों को संतुलित किया जा सके।
अब तक कोई ऐसी शिलालेख नहीं मिला है जो स्पष्ट तिथि या संरक्षक का उल्लेख करे, परन्तु चित्रांकन क्षेत्र के प्रारम्भिक मध्यकालीन कलात्मक मानकों के अनुरूप है।