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19 अक्टू. 2026•
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अमेठी के CHC मुसाफिरखाना के बाहर लगभग 30 मेडिकल स्टोर! सरकारी दवाओं पर उठे सवाल

✍️ रिपोर्टर: ashif 🗓 19 अक्टू. 2026, 07:08 PM 👁 14
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🚨 BIG BREAKING NEWS |
🎙️
जनपद अमेठी की तहसील मुसाफिरखाना से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल सामने आया है। सरकारी अस्पताल में मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी CHC मुसाफिरखाना के आसपास लगभग 30 मेडिकल स्टोर होने की बात कही जा रही है।
अब सवाल उठता है—जब सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवा की सुविधा है, तो मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोरों तक जाने की जरूरत क्यों पड़ती है?
क्या अस्पताल में मरीजों की जरूरत के मुताबिक सभी दवाएं उपलब्ध हैं? क्या डॉक्टरों की पर्ची पर लिखी हर दवा अस्पताल के काउंटर से मिल जाती है? और अगर कोई दवा उपलब्ध नहीं है, तो आखिर मरीज अपनी जेब से पैसा खर्च करने के लिए क्यों मजबूर हो?
दोस्तों, यह सवाल किसी एक मरीज का नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा करके अस्पताल पहुंचने वाले हर गरीब और जरूरतमंद परिवार का है।
🏥 अस्पताल अधीक्षक ने क्या कहा?
इस मामले में जब CHC मुसाफिरखाना के अस्पताल अधीक्षक से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है।
लेकिन जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब केवल बयान से नहीं, बल्कि दवाओं की उपलब्धता, मरीजों को किए गए वितरण और अस्पताल के रिकॉर्ड की पारदर्शी जांच से मिलना चाहिए।
🔥 सबसे बड़ा सवाल—मरीज की जेब पर इलाज का बोझ क्यों?
अगर मरीज को अस्पताल में दवा नहीं मिलती और उसे बाहर से खरीदनी पड़ती है, तो यह जानना जरूरी है कि संबंधित दवा सरकारी स्टॉक में उपलब्ध थी या नहीं। यदि दवा उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को बाहर से खरीदने के लिए कहा गया, तो इसकी भी जांच होनी चाहिए।
हालांकि, केवल अस्पताल के आसपास मेडिकल स्टोरों की संख्या से किसी तरह की मिलीभगत या अनियमितता साबित नहीं होती। लेकिन मरीजों की शिकायतों और दवा वितरण की वास्तविक स्थिति की जांच जरूर होनी चाहिए।
📢 अब स्वास्थ्य विभाग से पांच सीधे सवाल!
पहला—CHC मुसाफिरखाना में उपलब्ध सरकारी दवाओं की सूची क्या है?
दूसरा—क्या मरीजों को डॉक्टरों की पर्ची पर लिखी सभी उपलब्ध दवाएं मुफ्त मिल रही हैं?
तीसरा—यदि जरूरी दवाएं स्टॉक में नहीं हैं, तो उनकी कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
चौथा—क्या स्वास्थ्य विभाग अस्पताल की पर्चियों और मरीजों द्वारा बाहर से खरीदी गई दवाओं की जांच कराएगा?
पांचवां—क्या अधिकारी मरीजों से सीधे बातचीत करके वास्तविक स्थिति का पता लगाएंगे?
🎯 जनता की मांग—दावों से आगे बढ़कर हो जमीनी जांच!
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि CHC मुसाफिरखाना के दवा स्टॉक, वितरण रजिस्टर और मरीजों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएं। यदि कोई अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
क्योंकि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आने वाला गरीब मरीज राहत की उम्मीद लेकर पहुंचता है, अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाने के लिए नहीं।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन सवालों पर जांच कराता है या मरीजों की परेशानियां यूं ही बनी रहती हैं।
आपकी इस मामले पर क्या राय है? क्या सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की नियमित जांच होनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
नीड 24 उल्लखित आरोपों की स्वतंत्रता से पुष्टि नहीं करता
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