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05 अक्टू. 2026•
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अमेठी की बेटी ने खोजी ‘बेकार’ डंठल में रोजगार की नई कहानी

✍️ रिपोर्टर: ashif 🗓 05 अक्टू. 2026, 02:06 PM 👁 13
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अलसी के डंठल से निकलेगा रेशा, बनेगा लिनन कपड़ा! वैशाली सिंह को मिली पीएचडी

🚨 BREAKING NEWS |
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💥 किसानों की बेकार समझी जाने वाली फसल-अवशेष सामग्री बन सकती है अतिरिक्त कमाई का जरिया
मुसाफिरखाना/अमेठी। अलसी की कटाई के बाद खेतों में बेकार समझकर छोड़ दिए जाने वाले डंठल अब कपड़ा उद्योग के लिए काम की चीज साबित हो सकते हैं। दादरा गांव निवासी वैशाली सिंह ने अपने पीएचडी शोध में अलसी के डंठल से प्राकृतिक रेशा निकालकर उससे लिनन कपड़ा तैयार करने की संभावनाओं का अध्ययन किया है।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर से वैशाली सिंह को पीएचडी की डिग्री प्राप्त हुई है। उनके शोध ने अलसी के डंठल जैसे कृषि-अवशेष को उपयोगी संसाधन में बदलने की संभावनाओं पर नई दिशा दिखाई है।
🔥 खेत का ‘कचरा’ बन सकता है कमाई का जरिया
शोध के अनुसार अलसी की कटाई के बाद बचने वाले डंठल से प्राकृतिक रेशा तैयार कर वस्त्र उद्योग में इस्तेमाल किए जाने की संभावनाएं हैं। यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है तो किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिल सकता है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रेशा निकालने और प्रसंस्करण से जुड़े रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
🎓 अमेठी की बेटी की उपलब्धि
वैशाली सिंह की इस उपलब्धि से उनके गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता शशि सिंह, पिता संतोष सिंह और छोटे भाई को दिया।
वैशाली का शोध यह संदेश देता है कि खेत में बेकार दिखाई देने वाला हर अवशेष बेकार नहीं होता—सही शोध और तकनीक मिले तो वही किसानों की अतिरिक्त कमाई और ग्रामीण रोजगार का आधार बन सकता है।
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