🔥 ट्रेंडिंग Rajinikanth’s ‘Jailer 2’ Opens to 125-... Karnataka Government Grants Official A... જૂનાગઢમાં કોળી સમાજ દ્વારા નવરાત્રી રા... कर्नाटक: 48 घंटे के भीतर भौतिक RTI आवे... अमरोहा के बाबा घनश्याम दास वृद्धाश्रम... स्कूल या कोचिंग के बाद लापता 156 लड़कि...
18 अक्टू. 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা

अलावड़ा में सजेगा दशहरा का मैदान, 51 फीट के रावण का होगा दहन

✍️ रिपोर्टर: Rohitash Kumar 🗓 18 अक्टू. 2026, 03:52 PM 👁 21
शेयर करें: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post
अलावड़ा में सजेगा दशहरा का मैदान, 51 फीट के रावण का होगा दहन
41-41 फीट के मेघनाद-कुंभकर्ण के पुतले होंगे आकर्षण; डिजिटल तीरों से होगा राम-रावण युद्ध, चार पीढ़ियों से परिवार निभा रहा आयोजन की परंपरा
अलावड़ा। अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयदशमी पर्व अलावड़ा में 20 अक्टूबर को धूमधाम से मनाया जाएगा। ग्राम पंचायत अलावड़ा में श्री शिवराम कला मंच के तत्वावधान में आयोजित 37वीं श्री आदर्श रामलीला के समापन पर पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में दशहरा उत्सव होगा। इस दौरान 51 फीट ऊंचे रावण और 41-41 फीट ऊंचे मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाएगा। उत्सव को लेकर मैदान में तैयारियां शुरू हो गई हैं। कारीगर रावण परिवार के विशाल पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
कड़बी, कट्टों और बांस की बल्लियों से तैयार हो रहे पुतले
दशहरा मैदान में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का निर्माण पारंपरिक तरीके से किया जा रहा है। इसके लिए कड़बी, कट्टों, बांस की बल्लियों, रस्सियों और रंग-बिरंगे कपड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सबसे पहले बांस की बल्लियों से पुतलों का ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद रस्सियों से ढांचे को मजबूती देकर कड़बी और कट्टों की सहायता से पुतलों को आकार दिया जाता है। अंत में रंग-बिरंगे कपड़े लगाकर उन्हें आकर्षक रूप दिया जाता है।
पुतला निर्माण में जुटे कारीगर बाबूलाल बैरवा ने बताया कि इस बार रावण का पुतला 51 फीट ऊंचा, जबकि मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले 41-41 फीट ऊंचे बनाए जा रहे हैं। इतने विशाल पुतलों को तैयार करने में काफी मेहनत लगती है। ढांचा बनाने से लेकर उसे आकार देने और कपड़े लगाने तक हर काम सावधानी से करना पड़ता है। पुतलों को मजबूती से खड़ा करने के लिए बांस की बल्लियों और रस्सियों का विशेष ध्यान रखा जाता है।
डिजिटल तीरों से होगा राम-रावण युद्ध का मंचन
अलावड़ा के दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण रावण दहन से पहले होने वाला भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का मंचन रहेगा। इस बार रामलीला के कलाकार डिजिटल तीरों के माध्यम से राम-रावण युद्ध का दृश्य प्रस्तुत करेंगे। युद्ध के मंचन के बाद रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों का दहन किया जाएगा। आयोजन में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पहुंचने की उम्मीद है।
चार पीढ़ियों से निभा रहे रामलीला और दशहरा आयोजन की परंपरा
श्री शिवराम कला मंच के अध्यक्ष भवानी कालरा ने बताया कि अलावड़ा में रामलीला और दशहरा उत्सव की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। उनका परिवार चौथी पीढ़ी के रूप में इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उनके पिता, दादा-परदादा और पूर्वज रामलीला के आयोजन से लेकर रावण के पुतले तैयार करने तथा अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी स्वयं संभालते रहे हैं। पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन रामलीला और दशहरा उत्सव के प्रति परिवार का समर्पण आज भी कायम है।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक निभाते हैं रामलीला के किरदार
अलावड़ा की रामलीला की खासियत यह है कि इसमें कलाकारों को बाहर से नहीं बुलाया जाता। समिति से जुड़े सदस्यों के परिवारों के बच्चे, युवा और बुजुर्ग अलग-अलग पात्रों की भूमिका निभाते हैं। स्थानीय लोग अपनी दिनचर्या से समय निकालकर रामलीला के मंचन और आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। इससे नई पीढ़ी को रामायण की कथाओं, धार्मिक परंपराओं और अभिनय कला से जुड़ने का अवसर मिलता है।
चुनावी आचार संहिता के बीच तैयारियां जारी
पंचायत राज चुनाव की आचार संहिता के बीच दशहरा उत्सव की तैयारियां जारी हैं। रामलीला समिति के सदस्य पुतलों के निर्माण से लेकर मैदान की व्यवस्थाओं तक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। स्थानीय लोगों की सामूहिक भागीदारी के कारण अलावड़ा का दशहरा उत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि कस्बे की सांस्कृतिक पहचान भी बन चुका है। विजयदशमी पर रावण दहन के माध्यम से लोगों को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया जाएगा।
📲Get App