📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jakub Hałun
धर्म
अघोर अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु नाथ खड़ेश्वरी ने कहा, सनातन‑अघोर परम्परा में शव का कोई विधान नहीं
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 31 अग. 2026, 02:47 PM
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अघोर अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु नाथ खड़ेश्वरी महाराज ने कहा, सनातन धर्म और अघोर परम्परा दोनों में शव के साथ कोई भी तोड़‑फोड़ या मानव मांस का सेवन नहीं है।
मध्य प्रदेश – अघोर अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु नाथ खड़ेश्वरी महाराज ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया कि इस संप्रदाय के किसी भी अनुष्ठान में शव के साथ कोई कार्य नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि न तो सनातन धर्म में और न ही अघोर परम्परा में शव को तोड़‑फोड़ या छेड़छाड़ करने का कोई विधान है।
नेता ने यह रेखांकित किया कि अघोर साधना का मूल उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि और त्याग है, न कि मानव मांस का सेवन या शव का प्रयोग। उन्होंने शास्त्रों के हवाले से बताया कि ऐसी प्रथाएँ दोनों ही शिक्षाओं के विपरीत हैं।
खड़ेश्वरी ने कहा कि sensational रिपोर्टें समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं और मीडिया व जनता से प्रामाणिक स्रोतों पर भरोसा करने का आग्रह किया। उन्होंने दोहराया कि शव‑संबंधी किसी भी दावे के पीछे कोई सत्य नहीं है और यह अघोर सिद्धांतों के विरुद्ध है।
यह बयान राज्य में धार्मिक प्रथाओं पर बढ़ती जाँच के बीच आया है, जिससे अखाड़े ने कानूनी और नैतिक मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोबारा पुष्टि की है।
नेता ने यह रेखांकित किया कि अघोर साधना का मूल उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि और त्याग है, न कि मानव मांस का सेवन या शव का प्रयोग। उन्होंने शास्त्रों के हवाले से बताया कि ऐसी प्रथाएँ दोनों ही शिक्षाओं के विपरीत हैं।
खड़ेश्वरी ने कहा कि sensational रिपोर्टें समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं और मीडिया व जनता से प्रामाणिक स्रोतों पर भरोसा करने का आग्रह किया। उन्होंने दोहराया कि शव‑संबंधी किसी भी दावे के पीछे कोई सत्य नहीं है और यह अघोर सिद्धांतों के विरुद्ध है।
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