आरटीआई से खुलेगा शिकायतों और जांच रिपोर्टों का रिकॉर्ड! जगदीशपुर थाने से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक मांगा जवाब
अमेठी जनपद के जगदीशपुर क्षेत्र से जुड़ी शिकायतों और पुलिस की जांच प्रक्रिया का रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए गंगेश कुमार पाठक ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत चार अलग-अलग आवेदन तैयार किए हैं। इन आवेदनों के माध्यम से थाना जगदीशपुर, क्षेत्राधिकारी मुसाफिरखाना, पुलिस अधीक्षक कार्यालय अमेठी और मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित शिकायतों पर हुई कार्रवाई का विवरण मांगा गया है।
गंगेश कुमार पाठक के अनुसार, 20 अगस्त 2025 से अक्टूबर 2026 तक की अवधि से संबंधित शिकायतों, जांच आख्या और निस्तारण की स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से ये आवेदन तैयार किए गए हैं। उनका कहना है कि शिकायतों में फेसबुक आईडी, पोस्ट, टिप्पणियों, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े पहलुओं की जांच के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
शिकायतों की तारीखवार सूची और जांच रिपोर्ट की मांग
आरटीआई आवेदनों में शिकायतों की तारीखवार सूची, प्राप्ति एवं डायरी संख्या, जांच आख्या, निस्तारण रिपोर्ट, संबंधित आदेशों और पत्राचार की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं। इसके अलावा रजिस्टर्ड डाक, स्पीड पोस्ट और ईमेल के माध्यम से भेजे गए शिकायती पत्रों की प्राप्ति, संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने तथा उन पर की गई कार्रवाई से जुड़े उपलब्ध अभिलेखों की जानकारी भी मांगी गई है।
डिजिटल साक्ष्यों के संबंध में तकनीकी जांच अथवा साइबर जांच से जुड़े उपलब्ध पत्रों और रिपोर्टों का विवरण भी मांगा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायतों में प्रस्तुत साक्ष्यों के संबंध में अभिलेखों पर क्या कार्रवाई दर्ज है।
मुख्यमंत्री कार्यालय और जनसुनवाई पोर्टल का रिकॉर्ड भी मांगा
गंगेश पाठक ने मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित जनसुनवाई-आईजीआरएस, मुख्यमंत्री जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन 1076, सीएम डैशबोर्ड और सीपीग्राम्स (CPGRAMS) पर दर्ज संबंधित शिकायतों के उपलब्ध रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी है। आवेदनों में यह जानने का प्रयास किया गया है कि शिकायतें किन कार्यालयों को भेजी गईं, उन पर क्या कार्रवाई दर्ज हुई और उनके निस्तारण के संबंध में क्या रिपोर्ट उपलब्ध है।
आवेदनों में यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि कोई अभिलेख संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं है अथवा किसी अन्य लोक प्राधिकरण से संबंधित है, तो नियमानुसार उसकी स्थिति स्पष्ट की जाए। रिकॉर्ड अधिक होने की स्थिति में पहले शिकायतों की सूची उपलब्ध कराने और इसके बाद शेष दस्तावेजों का निरीक्षण करने का अवसर देने की मांग की गई है।
आरटीआई के जवाब से स्पष्ट होगी कार्रवाई की स्थिति
गंगेश कुमार पाठक का कहना है कि इन आवेदनों के माध्यम से शिकायतों पर हुई कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अब संबंधित लोक सूचना अधिकारियों के जवाब और उपलब्ध अभिलेखों से ही पता चलेगा कि किन शिकायतों पर क्या कार्रवाई दर्ज की गई है।
हालांकि, आरटीआई आवेदन तैयार किए जाने या जानकारी मांगे जाने मात्र से किसी अधिकारी अथवा व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती। मामले में संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष और आरटीआई के जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
नीड 24 इस खबर की स्वतंत्रता से पुष्टि नहीं करता है
गंगेश कुमार पाठक के अनुसार, 20 अगस्त 2025 से अक्टूबर 2026 तक की अवधि से संबंधित शिकायतों, जांच आख्या और निस्तारण की स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से ये आवेदन तैयार किए गए हैं। उनका कहना है कि शिकायतों में फेसबुक आईडी, पोस्ट, टिप्पणियों, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े पहलुओं की जांच के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
शिकायतों की तारीखवार सूची और जांच रिपोर्ट की मांग
आरटीआई आवेदनों में शिकायतों की तारीखवार सूची, प्राप्ति एवं डायरी संख्या, जांच आख्या, निस्तारण रिपोर्ट, संबंधित आदेशों और पत्राचार की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं। इसके अलावा रजिस्टर्ड डाक, स्पीड पोस्ट और ईमेल के माध्यम से भेजे गए शिकायती पत्रों की प्राप्ति, संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने तथा उन पर की गई कार्रवाई से जुड़े उपलब्ध अभिलेखों की जानकारी भी मांगी गई है।
डिजिटल साक्ष्यों के संबंध में तकनीकी जांच अथवा साइबर जांच से जुड़े उपलब्ध पत्रों और रिपोर्टों का विवरण भी मांगा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायतों में प्रस्तुत साक्ष्यों के संबंध में अभिलेखों पर क्या कार्रवाई दर्ज है।
मुख्यमंत्री कार्यालय और जनसुनवाई पोर्टल का रिकॉर्ड भी मांगा
गंगेश पाठक ने मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित जनसुनवाई-आईजीआरएस, मुख्यमंत्री जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन 1076, सीएम डैशबोर्ड और सीपीग्राम्स (CPGRAMS) पर दर्ज संबंधित शिकायतों के उपलब्ध रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी है। आवेदनों में यह जानने का प्रयास किया गया है कि शिकायतें किन कार्यालयों को भेजी गईं, उन पर क्या कार्रवाई दर्ज हुई और उनके निस्तारण के संबंध में क्या रिपोर्ट उपलब्ध है।
आवेदनों में यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि कोई अभिलेख संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं है अथवा किसी अन्य लोक प्राधिकरण से संबंधित है, तो नियमानुसार उसकी स्थिति स्पष्ट की जाए। रिकॉर्ड अधिक होने की स्थिति में पहले शिकायतों की सूची उपलब्ध कराने और इसके बाद शेष दस्तावेजों का निरीक्षण करने का अवसर देने की मांग की गई है।
आरटीआई के जवाब से स्पष्ट होगी कार्रवाई की स्थिति
गंगेश कुमार पाठक का कहना है कि इन आवेदनों के माध्यम से शिकायतों पर हुई कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अब संबंधित लोक सूचना अधिकारियों के जवाब और उपलब्ध अभिलेखों से ही पता चलेगा कि किन शिकायतों पर क्या कार्रवाई दर्ज की गई है।
हालांकि, आरटीआई आवेदन तैयार किए जाने या जानकारी मांगे जाने मात्र से किसी अधिकारी अथवा व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती। मामले में संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष और आरटीआई के जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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