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आरएमडब्ल्यू कॉलेज में कर्मचारी ने प्राचार्य पर मनमानी का आरोप, कुलपति से निष्पक्ष जांच की गुहार
नवादा के आरएमडब्ल्यू कॉलेज में कार्यरत कर्मचारी प्रमोद कुमार ने प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार पर मनमानी से अनुपस्थित दर्शाने का आरोप लगाते हुए मगध विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव से निष्पक्ष जांच की मांग की।
नवादा के आरएमडब्ल्यू कॉलेज में कार्यरत कर्मचारी प्रमोद कुमार ने प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार पर मनमानी से अनुपस्थित दर्शाने का आरोप लगाते हुए मगध विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव से निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।
कर्मचारी के अनुसार, 4 नवंबर 2026 को वे सुबह 4:30 बजे अपने घर से कॉलेज के लिए निकले थे। रास्ते में घना कोहरा और जाम के कारण विलंब हुआ। विलंब की जानकारी होते ही उन्होंने सुबह 8:42 बजे व्हाट्सएप के माध्यम से बड़े बाबू एवं ऑनलाइन उपस्थिति देखने वाले मुकेश कुमार को छुट्टी का आवेदन भेज दिया था तथा फोन पर भी सूचना दी थी।
फिर भी प्राचार्य ने उन्हें अनुपस्थित दर्शाते हुए विश्वविद्यालय को रिपोर्ट भेज दी। जब कर्मचारी ने प्राचार्य से बातचीत की तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
प्रमोद कुमार ने 20 वर्षों के कार्यकाल में डॉ. कामेश्वर शर्मा, डॉ. गणेश महतो, डॉ. शिवमंगल सिंह, प्रोफेसर दद्दन सिंह और डॉ. शैलेश कुमार श्रीवास्तव समेत कई प्राचार्यों के साथ काम किया है, और पूर्व में ऐसी स्थिति कभी नहीं हुई। वे मानते हैं कि वर्तमान प्राचार्य के व्यवहार के पीछे व्यक्तिगत नाराजगी हो सकती है।
कर्मचारी ने मगध विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा तथ्यों के आधार पर यथाशीघ्र न्याय दिलाने की मांग की है। फिलहाल, प्राचार्य या कॉलेज प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
कर्मचारी के अनुसार, 4 नवंबर 2026 को वे सुबह 4:30 बजे अपने घर से कॉलेज के लिए निकले थे। रास्ते में घना कोहरा और जाम के कारण विलंब हुआ। विलंब की जानकारी होते ही उन्होंने सुबह 8:42 बजे व्हाट्सएप के माध्यम से बड़े बाबू एवं ऑनलाइन उपस्थिति देखने वाले मुकेश कुमार को छुट्टी का आवेदन भेज दिया था तथा फोन पर भी सूचना दी थी।
फिर भी प्राचार्य ने उन्हें अनुपस्थित दर्शाते हुए विश्वविद्यालय को रिपोर्ट भेज दी। जब कर्मचारी ने प्राचार्य से बातचीत की तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
प्रमोद कुमार ने 20 वर्षों के कार्यकाल में डॉ. कामेश्वर शर्मा, डॉ. गणेश महतो, डॉ. शिवमंगल सिंह, प्रोफेसर दद्दन सिंह और डॉ. शैलेश कुमार श्रीवास्तव समेत कई प्राचार्यों के साथ काम किया है, और पूर्व में ऐसी स्थिति कभी नहीं हुई। वे मानते हैं कि वर्तमान प्राचार्य के व्यवहार के पीछे व्यक्तिगत नाराजगी हो सकती है।
कर्मचारी ने मगध विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा तथ्यों के आधार पर यथाशीघ्र न्याय दिलाने की मांग की है। फिलहाल, प्राचार्य या कॉलेज प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।