📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shaq774 at en.wikipedia
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AAIB ने 2025 के केदारनाथ दुर्घटना के बाद पहाड़ी प्रशिक्षण और रेडियो रिकॉर्डिंग पर ज़ोर दिया
✍️ India Today
🗓 17 अक्टू. 2026, 07:36 AM
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एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने 2025 में केदारनाथ, उत्तराखंड में हुए दुर्घटना के बाद पायलटों के लिए पहाड़ी प्रशिक्षण और कॉकपिट रेडियो कॉल रिकॉर्डिंग को अनिवार्य करने की सिफारिश की है।
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने उत्तराखंड के केदारनाथ के पास 2025 में हुई घातक दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट जारी की। जांच में पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च‑ऊंचाई और तीव्र ढलान वाले संचालन में पायलटों की दक्षता की कमी और कॉकपिट संवाद के रिकॉर्ड न होने को प्रमुख कारण बताया गया।
इन खामियों को दूर करने के लिए AAIB ने हिमालयी क्षेत्रों में संचालित होने वाली एयरलाइनों को अनिवार्य पहाड़ी प्रशिक्षण मॉड्यूल अपनाने की सलाह दी है, जिसमें संकरी घाटियों और अचानक वायु शियर की स्थितियों को सिम्युलेटर में दोहराया जाएगा। साथ ही, सभी उन विमानों में कॉकपिट वॉयस‑रिकॉर्डिंग सिस्टम की स्थापना को अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है जो पहाड़ी हवाई अड्डों के लिए उड़ान भरते हैं।
यह सिफारिशें हालिया कई घटनाओं के बाद सुरक्षा को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं। AAIB ने कहा कि इन उपायों को लागू करने से विशेषकर तीर्थयात्रा के मौसम में केदारनाथ की बढ़ती ट्रैफ़िक के दौरान समान दुर्घटनाओं की संभावना काफी घटेगी।
ब्यूरो अनुपालन की निगरानी करेगा और सिविल एविएशन मंत्रालय को समय‑समय पर समीक्षा प्रस्तुत करेगा। एयरलाइनों को तीन महीने के भीतर कार्यान्वयन योजना जमा करने का निर्देश दिया गया है।
इन प्रोटोकॉल को अपनाने से पायलटों की स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जांचकर्ताओं को आवश्यक डेटा प्राप्त होगा, जिससे भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में समग्र हवाई सुरक्षा में सुधार होगा।
इन खामियों को दूर करने के लिए AAIB ने हिमालयी क्षेत्रों में संचालित होने वाली एयरलाइनों को अनिवार्य पहाड़ी प्रशिक्षण मॉड्यूल अपनाने की सलाह दी है, जिसमें संकरी घाटियों और अचानक वायु शियर की स्थितियों को सिम्युलेटर में दोहराया जाएगा। साथ ही, सभी उन विमानों में कॉकपिट वॉयस‑रिकॉर्डिंग सिस्टम की स्थापना को अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है जो पहाड़ी हवाई अड्डों के लिए उड़ान भरते हैं।
यह सिफारिशें हालिया कई घटनाओं के बाद सुरक्षा को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं। AAIB ने कहा कि इन उपायों को लागू करने से विशेषकर तीर्थयात्रा के मौसम में केदारनाथ की बढ़ती ट्रैफ़िक के दौरान समान दुर्घटनाओं की संभावना काफी घटेगी।
ब्यूरो अनुपालन की निगरानी करेगा और सिविल एविएशन मंत्रालय को समय‑समय पर समीक्षा प्रस्तुत करेगा। एयरलाइनों को तीन महीने के भीतर कार्यान्वयन योजना जमा करने का निर्देश दिया गया है।
इन प्रोटोकॉल को अपनाने से पायलटों की स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जांचकर्ताओं को आवश्यक डेटा प्राप्त होगा, जिससे भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में समग्र हवाई सुरक्षा में सुधार होगा।