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90 दिन में चार्जशीट मिलने पर निलंबन स्वतः खत्म नहीं होगा: हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच का आदेश पलटा
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मामला कोरबा कलेक्टोरेट में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 शिवम सहाय चौहान से जुड़ा है। आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद उन्हें 25 मार्च 2022 को निलंबित किया गया था।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को निलंबन के 90 दिनों के भीतर विभागीय चार्जशीट दे दी गई है, तो निलंबन अवधि बढ़ाने का आदेश समय पर जारी नहीं होने मात्र से निलंबन स्वतः समाप्त नहीं माना जाएगा। डिवीजन बेंच ने इस मामले में सिंगल बेंच के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें निलंबन और उसके बाद जारी एक्सटेंशन आदेश को रद्द कर कर्मचारी को बहाल करने का निर्देश दिया गया था।
मामला कोरबा कलेक्टोरेट में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 शिवम सहाय चौहान से जुड़ा है। आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद उन्हें 25 मार्च 2022 को निलंबित किया गया था। इसके बाद विभाग की ओर से उन्हें 20 अप्रैल 2022 को निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर विभागीय चार्जशीट सौंप दी गई। हालांकि, निलंबन को आगे बढ़ाने का आदेश करीब डेढ़ वर्ष बाद 28 अगस्त 2023 को जारी किया गया।
कर्मचारी ने निलंबन अवधि बढ़ाने में हुई देरी को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सिंगल बेंच ने मामले में निलंबन आदेश और बाद में जारी एक्सटेंशन आदेश को रद्द करते हुए कर्मचारी को बहाल करने का निर्देश दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन ने डिवीजन बेंच में अपील की।
डिवीजन बेंच ने शासन की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत कर्मचारी को 90 दिनों के भीतर विभागीय चार्जशीट मिल चुकी थी। ऐसे में केवल निलंबन अवधि बढ़ाने का आदेश जारी होने में देरी के आधार पर निलंबन को स्वतः समाप्त नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि 90 दिन की समय सीमा को इस तरह लागू करने से विभागीय नियमों के अन्य प्रावधान निष्प्रभावी हो जाएंगे।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को लंबे समय तक अनिश्चितकालीन निलंबन में रखना उचित नहीं है। सक्षम प्राधिकारियों को निलंबन जारी रखने की आवश्यकता की निष्पक्ष समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि निलंबन की आवश्यकता नहीं रह गई हो तो कर्मचारी को किसी गैर-संवेदनशील पद पर वापस पदस्थ किया जा सकता है।
मामला कोरबा कलेक्टोरेट में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 शिवम सहाय चौहान से जुड़ा है। आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद उन्हें 25 मार्च 2022 को निलंबित किया गया था। इसके बाद विभाग की ओर से उन्हें 20 अप्रैल 2022 को निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर विभागीय चार्जशीट सौंप दी गई। हालांकि, निलंबन को आगे बढ़ाने का आदेश करीब डेढ़ वर्ष बाद 28 अगस्त 2023 को जारी किया गया।
कर्मचारी ने निलंबन अवधि बढ़ाने में हुई देरी को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सिंगल बेंच ने मामले में निलंबन आदेश और बाद में जारी एक्सटेंशन आदेश को रद्द करते हुए कर्मचारी को बहाल करने का निर्देश दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन ने डिवीजन बेंच में अपील की।
डिवीजन बेंच ने शासन की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत कर्मचारी को 90 दिनों के भीतर विभागीय चार्जशीट मिल चुकी थी। ऐसे में केवल निलंबन अवधि बढ़ाने का आदेश जारी होने में देरी के आधार पर निलंबन को स्वतः समाप्त नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि 90 दिन की समय सीमा को इस तरह लागू करने से विभागीय नियमों के अन्य प्रावधान निष्प्रभावी हो जाएंगे।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को लंबे समय तक अनिश्चितकालीन निलंबन में रखना उचित नहीं है। सक्षम प्राधिकारियों को निलंबन जारी रखने की आवश्यकता की निष्पक्ष समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि निलंबन की आवश्यकता नहीं रह गई हो तो कर्मचारी को किसी गैर-संवेदनशील पद पर वापस पदस्थ किया जा सकता है।