स्थानीय
70 वर्षीय बिगन पाहन की 44 साल पुरानी इच्छा पूरी: कटे हाथ का शव के साथ हुआ अंतिम संस्कार
झारखंड के गुमला जिले में एक अनोखी अंतिम इच्छा पूरी हुई, जहाँ 70 वर्षीय बिगन पाहन के निधन के बाद उनके 44 साल पहले जान बचाने के लिए काटे गए हाथ का भी उनके शव के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
बारियातू प्रखंड के टोंटी पंचायत के इटके गांव निवासी 70 वर्षीय बिगन पाहन का रविवार रात निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। सोमवार को स्थानीय मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान, उनकी 44 साल पुरानी एक अनोखी इच्छा को पूरा किया गया, जिसके तहत उनके कटे हुए हाथ का भी उनके शव के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बिगन पाहन ने इस हाथ को पिछले चार दशकों से अधिक समय तक एक बक्से में संभाल कर रखा था।
परिजनों के अनुसार, बिगन पाहन की यह अंतिम इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनके कटे हुए हाथ का भी उनके शव के साथ ही अंतिम संस्कार किया जाए। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए, परिवार ने हाथ को शव के साथ ही अग्नि को समर्पित कर दिया।
यह घटना लगभग 44 वर्ष पूर्व की है, जब बिगन पाहन लगभग 26 वर्ष के थे। वे जंगल में जलावन की लकड़ी काट रहे थे, तभी लकड़ी का एक बड़ा टुकड़ा उनके दाहिने हाथ पर गिर गया। हाथ बुरी तरह दब गया और काफी प्रयास के बाद भी वह लकड़ी के नीचे से नहीं निकल सका।
शाम ढलने लगी थी और वे घटनास्थल पर अकेले थे। ऐसी विकट परिस्थिति में, अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने हिम्मत जुटाकर टांगी से अपने दबे हुए हाथ को काटकर शरीर से अलग कर दिया। इसके बाद उन्होंने किसी तरह लकड़ी हटाई और कटे हुए हाथ को लेकर रात में घर पहुंचे।42 दिनों तक चला था इलाज
घर पहुंचने के बाद परिजन उन्हें बालूमाथ सीएचसी ले गये. परिजनों के अनुसार, तत्कालीन चिकित्सा पदाधिकारी डॉ गुप्ता की देखरेख में उनका करीब 42 दिनों तक इलाज चला. इलाज के बाद वे स्वस्थ हुए और सामान्य जीवन जीते रहे.
हाथ कट जाने के बाद भी बिगन ने उसे फेंका नहीं. उन्होंने कटे हाथ को एक बक्से में सुरक्षित रख लिया था. करीब 44 वर्षों तक वह हाथ उसी बक्से में रखा रहा.परिवार में पत्नी और चार बेटे-बेटियां
बिगन पाहन अपने पीछे पत्नी फुदकी देवी, पुत्र विश्वनाथ गंझू, लालदीप गंझू और संदीप गंझू तथा पुत्रियां कौशिला देवी और चिंता देवी समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं.
उनके निधन की सूचना मिलने पर टोंटी पंचायत के पंसस मो होजैफा, नंदू उरांव, कैलाश राम और ग्राम प्रधान सकिंदर राम समेत कई लोग उनके घर पहुंचे.
परिजनों के अनुसार, बिगन पाहन की यह अंतिम इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनके कटे हुए हाथ का भी उनके शव के साथ ही अंतिम संस्कार किया जाए। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए, परिवार ने हाथ को शव के साथ ही अग्नि को समर्पित कर दिया।
यह घटना लगभग 44 वर्ष पूर्व की है, जब बिगन पाहन लगभग 26 वर्ष के थे। वे जंगल में जलावन की लकड़ी काट रहे थे, तभी लकड़ी का एक बड़ा टुकड़ा उनके दाहिने हाथ पर गिर गया। हाथ बुरी तरह दब गया और काफी प्रयास के बाद भी वह लकड़ी के नीचे से नहीं निकल सका।
शाम ढलने लगी थी और वे घटनास्थल पर अकेले थे। ऐसी विकट परिस्थिति में, अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने हिम्मत जुटाकर टांगी से अपने दबे हुए हाथ को काटकर शरीर से अलग कर दिया। इसके बाद उन्होंने किसी तरह लकड़ी हटाई और कटे हुए हाथ को लेकर रात में घर पहुंचे।42 दिनों तक चला था इलाज
घर पहुंचने के बाद परिजन उन्हें बालूमाथ सीएचसी ले गये. परिजनों के अनुसार, तत्कालीन चिकित्सा पदाधिकारी डॉ गुप्ता की देखरेख में उनका करीब 42 दिनों तक इलाज चला. इलाज के बाद वे स्वस्थ हुए और सामान्य जीवन जीते रहे.
हाथ कट जाने के बाद भी बिगन ने उसे फेंका नहीं. उन्होंने कटे हाथ को एक बक्से में सुरक्षित रख लिया था. करीब 44 वर्षों तक वह हाथ उसी बक्से में रखा रहा.परिवार में पत्नी और चार बेटे-बेटियां
बिगन पाहन अपने पीछे पत्नी फुदकी देवी, पुत्र विश्वनाथ गंझू, लालदीप गंझू और संदीप गंझू तथा पुत्रियां कौशिला देवी और चिंता देवी समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं.
उनके निधन की सूचना मिलने पर टोंटी पंचायत के पंसस मो होजैफा, नंदू उरांव, कैलाश राम और ग्राम प्रधान सकिंदर राम समेत कई लोग उनके घर पहुंचे.