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12 Oct 2026•
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45 किमी का सफर तय कर बच्चों का भविष्य संवार रहीं पूनम गौर, खुद संघर्ष कर हासिल किया मुकाम

✍️ Reporter: Harshit 🗓 12 Oct 2026, 12:39 PM 👁 12
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हाथरस के सिकंदराराऊ की रहने वाली पूनम गौर ने महिला सशक्तिकरण की अनोखी मिसाल पेश की है। शादी के बाद कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई पूरी की और 2010 में संविदा पर शिक्षिका के रूप में चयनित हुईं। आज वह रोजाना 45 किलोमीटर का सफर तय कर कासगंज के फरीदपुर गांव स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में वंचित समाज की बेटियों को पढ़ाती हैं और गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा भी देती हैं।

हाथरस जिले के सिकंदराराऊ से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो हर महिला के लिए मिसाल है।
सिकंदराराऊ निवासी पूनम गौर ने अपने संघर्ष और समर्पण से महिला सशक्तिकरण की नई परिभाषा गढ़ी है। शादी के बाद मुश्किल हालात और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। परिवार पर बोझ न बनते हुए उन्होंने 1994 से ही निजी स्कूलों में पढ़ाते हुए अपनी शिक्षा जारी रखी।

उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2010 में संविदा के आधार पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, फरीदपुर (कासगंज) में उनकी नियुक्ति हो गई।

आज पूनम गौर प्रतिदिन सिकंदराराऊ से 40 से 45 किलोमीटर का सफर तय कर फरीदपुर गांव के सरकारी विद्यालय में पहुंचती हैं। यहां वे गरीब और वंचित परिवारों की बालिकाओं को न केवल स्कूली शिक्षा दे रही हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारी नौकरियों की तैयारी में भी मदद कर रही हैं।
विद्यालय में छात्राओं द्वारा फूलों से उनका स्वागत और तालियों से सम्मान किया जाता है, जो उनके प्रति बच्चों के प्रेम को दर्शाता है।
पूनम जी का कहना है कि जब उनकी पढ़ाई हुई छात्राएं ब्लॉक में, नर्सिंग में, शिक्षिका बनकर या अन्य क्षेत्रों में सफल होती हैं तो उन्हें सबसे ज्यादा खुशी मिलती है। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ उनका यह संघर्ष आज दूसरी महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
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