📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ms Sarah Welch
विज्ञान
3.5 अरब साल पुरानी झारखंड की चट्टान में मिल सकता है पृथ्वी का सबसे पुराना जीवन संकेत
✍️ Organiser
🗓 30 अग. 2026, 11:48 PM
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वैज्ञानिकों ने झारखंड की 3.5 अरब साल पुरानी चट्टान में ऐसे संरचनाओं को पहचाना है, जो पृथ्वी के सबसे प्राचीन सूक्ष्मजीव जीवन के संकेत हो सकते हैं।
झारखंड के एक दूरस्थ चट्टान स्थल से प्राप्त 3.5 अर्ब साल पुरानी चट्टान का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने उसमें सूक्ष्मजीव कॉलोनी जैसी संरचनाओं के संकेत पाए हैं। रेडियोमेट्रिक डेटिंग से पुष्टि हुई है कि यह चट्टान अरेकियन युग की है, जब पृथ्वी की सतह अभी बन रही थी और जीवन केवल सरल जीवों तक सीमित था।
पेट्रोग्राफिक जांच में खनिज मैट्रिक्स के भीतर नली जैसी और गोले जैसी आकृतियों का पता चला, जिन्हें शोधकर्ता प्रारम्भिक बैक्टीरिया या आर्किया के जीवाश्म के रूप में देख रहे हैं। इन आकारों की तुलना अन्य प्रीकैंब्रियन स्थलांकों के ज्ञात माइक्रोफॉसिल से की गई है, पर यह झारखंड नमूना अधिक प्राचीन है।
यदि इस व्याख्या की पुष्टि होती है, तो यह पृथ्वी पर जीवन के सबसे पुराने प्रत्यक्ष प्रमाण को कई सौ मिलियन साल आगे बढ़ा देगा, जिससे वर्तमान सिद्धांत—जो जीवन के उद्भव को लगभग 3.2 अर्ब साल पुराना मानता है—पर प्रश्न उठेंगे। यह खोज भारत को उन सीमित क्षेत्रों में जोड़ती है, जहाँ पायलबरा (ऑस्ट्रेलिया) और बार्बर्टन ग्रीनस्टोन बेल्ट (दक्षिण अफ्रीका) जैसी जगहों से सबसे पुराने जीववैज्ञानिक संकेत मिले हैं।
वैज्ञानिक इस बात पर बल दे रहे हैं कि अब और रासायनिक‑आइसोटोप परीक्षण आवश्यक है, ताकि गैर‑जैविक प्रक्रियाओं को बाहर किया जा सके। परिणामों को इस वर्ष के अंत में सहकर्मी‑समीक्षित जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा, और इस चट्टान को पृथ्वी के प्राचीन बायोस्फीयर के अध्ययन हेतु संरक्षित रखा जाएगा।
पेट्रोग्राफिक जांच में खनिज मैट्रिक्स के भीतर नली जैसी और गोले जैसी आकृतियों का पता चला, जिन्हें शोधकर्ता प्रारम्भिक बैक्टीरिया या आर्किया के जीवाश्म के रूप में देख रहे हैं। इन आकारों की तुलना अन्य प्रीकैंब्रियन स्थलांकों के ज्ञात माइक्रोफॉसिल से की गई है, पर यह झारखंड नमूना अधिक प्राचीन है।
यदि इस व्याख्या की पुष्टि होती है, तो यह पृथ्वी पर जीवन के सबसे पुराने प्रत्यक्ष प्रमाण को कई सौ मिलियन साल आगे बढ़ा देगा, जिससे वर्तमान सिद्धांत—जो जीवन के उद्भव को लगभग 3.2 अर्ब साल पुराना मानता है—पर प्रश्न उठेंगे। यह खोज भारत को उन सीमित क्षेत्रों में जोड़ती है, जहाँ पायलबरा (ऑस्ट्रेलिया) और बार्बर्टन ग्रीनस्टोन बेल्ट (दक्षिण अफ्रीका) जैसी जगहों से सबसे पुराने जीववैज्ञानिक संकेत मिले हैं।
वैज्ञानिक इस बात पर बल दे रहे हैं कि अब और रासायनिक‑आइसोटोप परीक्षण आवश्यक है, ताकि गैर‑जैविक प्रक्रियाओं को बाहर किया जा सके। परिणामों को इस वर्ष के अंत में सहकर्मी‑समीक्षित जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा, और इस चट्टान को पृथ्वी के प्राचीन बायोस्फीयर के अध्ययन हेतु संरक्षित रखा जाएगा।