📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vulpes-bengalensis
देश
बिहार की 3 साल की बाघनी को बक्सा टाइगर रिज़र्व में छोड़ा, 8 साल बाद गूँज आई
✍️ Hindustan Times
🗓 02 अक्टू. 2026, 05:16 PM
👁 12
बिहार से बचाई गई 3 साल की बाघनी को आज पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिज़र्व में छोड़ा गया, जिससे 8 साल बाद पहली बार बाघ की दहाड़ सुनाई दी।
वन विभाग ने बिहार से बचाई गई 3 साल की बाघनी को पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिज़र्व में आज छोड़ा। यह ट्रांसलोकेशन कड़े पशु चिकित्सा निगरानी के तहत किया गया और बाघनी को आरक्षित क्षेत्र के ऐसे हिस्से में छोड़ा गया जहाँ शिकार की प्रचुरता है।
यह कदम बक्सा में आठ साल के बाद पहली बार बाघ की उपस्थिति को प्रमाणित करता है; रिलीज़ के तुरंत बाद बाघनी की दहाड़ सुनाई दी, जिससे वन अधिकारियों को उसकी सफल अनुकूलन की पुष्टि मिली।
बक्सा, जो पूर्वी हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा है, कई वर्षों से बाघों की कमी से जूझ रहा था। युवा बाघनी को यहाँ लाकर जनसंख्या बढ़ाने और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने का लक्ष्य है।
अधिकारियों ने बाघनी को जीपीएस कॉलर और कैमरा ट्रैप से निगरानी करने की योजना बनाई है, ताकि उसकी चाल, स्वास्थ्य और अन्य वन्यजीवों के साथ संपर्क को समझा जा सके। इस पहल की सफलता क्षेत्र में आगे और बाघ ट्रांसलोकेशन के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
यह कदम बक्सा में आठ साल के बाद पहली बार बाघ की उपस्थिति को प्रमाणित करता है; रिलीज़ के तुरंत बाद बाघनी की दहाड़ सुनाई दी, जिससे वन अधिकारियों को उसकी सफल अनुकूलन की पुष्टि मिली।
बक्सा, जो पूर्वी हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा है, कई वर्षों से बाघों की कमी से जूझ रहा था। युवा बाघनी को यहाँ लाकर जनसंख्या बढ़ाने और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने का लक्ष्य है।
अधिकारियों ने बाघनी को जीपीएस कॉलर और कैमरा ट्रैप से निगरानी करने की योजना बनाई है, ताकि उसकी चाल, स्वास्थ्य और अन्य वन्यजीवों के साथ संपर्क को समझा जा सके। इस पहल की सफलता क्षेत्र में आगे और बाघ ट्रांसलोकेशन के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती है।