📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pakshya
स्थानीय
21 साल के बित्तु तबाही ने एजनर नदी को 8 महीनों में साफ किया
✍️ Jagran Josh
🗓 22 अक्टू. 2026, 03:47 AM
👁 17
21 साल के युवा कार्यकर्ता बित्तु तबाही ने केवल आठ महीनों में मध्य प्रदेश की एजनर नदी को पूरी तरह साफ किया, जिससे नदी संरक्षण पर ध्यान केंद्रित हुआ।
मध्य प्रदेश की एजनर नदी, जो आसपास के गाँवों में कृषि और दैनिक जीवन के लिये महत्वपूर्ण जल स्रोत है, 21‑साल के युवा कार्यकर्ता बित्तु तबाही के नेतृत्व में एक उल्लेखनीय सफाई अभियान का केंद्र बनी। आठ महीने की अवधि में बित्तु ने स्वयंसेवकों को संगठित किया, कचरा एकत्र करने की पहलों का समन्वय किया और नदी किनारे जमा हुए प्लास्टिक व अन्य कचरे को हटाने के लिये सरल, कम लागत वाले फ़िल्टरिंग उपाय अपनाए।
बित्तु ने बढ़ते प्रदूषण को देखा, जो नदी के पारिस्थितिक संतुलन और पास के किसानों की आजीविका को खतरे में डाल रहा था। स्कूल के छात्रों, सामुदायिक समूहों और स्थानीय NGOs को जोड़कर उन्होंने हजारों किलोग्राम प्लास्टिक, जैविक कचरा और अन्य प्रदूषकों को हटाया।
स्थानीय प्राधिकरणों ने इस उपलब्धि को सराहा, जल की स्पष्टता में स्पष्ट सुधार और बदबू में कमी की रिपोर्ट की। जबकि नदी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिये सतत सामुदायिक निगरानी और उचित कचरा प्रबंधन नीतियों की आवश्यकता होगी, बित्तु का कार्य राज्य में जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय कार्रवाई के लिये एक मिसाल स्थापित करता है।
इस सफाई ने मध्य प्रदेश भर में नदी संरक्षण पर व्यापक चर्चा को भी जन्म दिया है, कई जिलों ने इस मॉडल को दोहराने में रुचि जताई है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने भारत के जल संसाधनों को बचाने के लिये सरकारी पहलों के साथ नागरिक‑प्रेरित परियोजनाओं के महत्व पर बल दिया।
बित्तु ने बढ़ते प्रदूषण को देखा, जो नदी के पारिस्थितिक संतुलन और पास के किसानों की आजीविका को खतरे में डाल रहा था। स्कूल के छात्रों, सामुदायिक समूहों और स्थानीय NGOs को जोड़कर उन्होंने हजारों किलोग्राम प्लास्टिक, जैविक कचरा और अन्य प्रदूषकों को हटाया।
स्थानीय प्राधिकरणों ने इस उपलब्धि को सराहा, जल की स्पष्टता में स्पष्ट सुधार और बदबू में कमी की रिपोर्ट की। जबकि नदी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिये सतत सामुदायिक निगरानी और उचित कचरा प्रबंधन नीतियों की आवश्यकता होगी, बित्तु का कार्य राज्य में जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय कार्रवाई के लिये एक मिसाल स्थापित करता है।
इस सफाई ने मध्य प्रदेश भर में नदी संरक्षण पर व्यापक चर्चा को भी जन्म दिया है, कई जिलों ने इस मॉडल को दोहराने में रुचि जताई है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने भारत के जल संसाधनों को बचाने के लिये सरकारी पहलों के साथ नागरिक‑प्रेरित परियोजनाओं के महत्व पर बल दिया।