1948 से जल रही संस्कृति की मशाल, छतरपुर की रामलीला आज भी दे रही सद्भाव का संदेश
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1948 से रामलीला के मंच पर एकता का संदेश, NBT की ‘उत्कृष्ट रामलीला’ के बाद बढ़ा गौरवp
1948 से संस्कृति और सद्भाव का संदेश दे रही छतरपुर की ऐतिहासिक रामलीला
नई दिल्ली, छतरपुर। वर्ष 1948 से निरंतर आयोजित हो रही छतरपुर की ऐतिहासिक श्रीरामलीला एवं विजयादशमी आज क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता की पहचान बन चुकी है। यूथ वैलफेयर ड्रामेटिक क्लब (पंजीकृत) द्वारा स्थानीय कलाकारों के सहयोग से आयोजित यह रामलीला श्रीराम के आदर्शों के साथ सर्वधर्म सद्भाव और भाईचारे का संदेश देती है।
वर्तमान में यूथ वैलफेयर ड्रामेटिक क्लब (पंजीकृत), छतरपुर के संचालन की जिम्मेदारी अध्यक्ष नरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष विकास शर्मा, महासचिव मनीष सिलोटिया, कोषाध्यक्ष मुकेश कछवाया तथा निर्देशक शेखर कछवाया संभाल रहे हैं। क्लब के सह-निर्देशक वासिम खान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, वहीं सरदार हरप्रीत सिंह स्वयंसेवक के रूप में सेवा देकर आयोजन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। अलग-अलग समुदायों की यह सहभागिता रामलीला को सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल बनाती है।
वर्ष 2025 में NBT द्वारा इसे उत्कृष्ट रामलीला के तौर पर चुना गया था। इस वर्ष रामलीला का भूमि पूजन रविवार, 20 सितंबर को सुबह 11 बजे रामलीला चौक वाली गली, छतरपुर में होगा। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।
करीब आठ दशकों की यह यात्रा आज भी यही संदेश दे रही है—श्रीराम की मर्यादा के साथ समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव।
नई दिल्ली, छतरपुर। वर्ष 1948 से निरंतर आयोजित हो रही छतरपुर की ऐतिहासिक श्रीरामलीला एवं विजयादशमी आज क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता की पहचान बन चुकी है। यूथ वैलफेयर ड्रामेटिक क्लब (पंजीकृत) द्वारा स्थानीय कलाकारों के सहयोग से आयोजित यह रामलीला श्रीराम के आदर्शों के साथ सर्वधर्म सद्भाव और भाईचारे का संदेश देती है।
वर्तमान में यूथ वैलफेयर ड्रामेटिक क्लब (पंजीकृत), छतरपुर के संचालन की जिम्मेदारी अध्यक्ष नरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष विकास शर्मा, महासचिव मनीष सिलोटिया, कोषाध्यक्ष मुकेश कछवाया तथा निर्देशक शेखर कछवाया संभाल रहे हैं। क्लब के सह-निर्देशक वासिम खान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, वहीं सरदार हरप्रीत सिंह स्वयंसेवक के रूप में सेवा देकर आयोजन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। अलग-अलग समुदायों की यह सहभागिता रामलीला को सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल बनाती है।
वर्ष 2025 में NBT द्वारा इसे उत्कृष्ट रामलीला के तौर पर चुना गया था। इस वर्ष रामलीला का भूमि पूजन रविवार, 20 सितंबर को सुबह 11 बजे रामलीला चौक वाली गली, छतरपुर में होगा। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।
करीब आठ दशकों की यह यात्रा आज भी यही संदेश दे रही है—श्रीराम की मर्यादा के साथ समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव।