📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Snehrashmi
टेक्नोलॉजी
18 साल के युवा ने गुजरात में सेमीकंडक्टर वेंचर शुरू किया, 80 करोड़ रुपये का कारखाना बनाएंगे
✍️ India Today
🗓 28 सित. 2026, 04:02 PM
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एक 18‑साल के उद्यमी ने गुजरात में सेमीकंडक्टर वेंचर की स्थापना की और 80 करोड़ रुपये के कारखाने के निर्माण की योजना बताई।
गुजरात में एक 18‑साल के युवा ने सेमीकंडक्टर वेंचर की शुरुआत की, जिससे भारत के हाई‑टेक निर्माण क्षेत्र में सबसे कम उम्र के उद्यमियों में से एक का प्रवेश हुआ। यह स्टार्ट‑अप लगभग 80 करोड़ रुपये के निवेश से एक चिप‑निर्माण कारखाना स्थापित करने की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य घरेलू बाजार के लिए इंटीग्रेटेड सर्किट बनाना है।
उद्यमी ने कहा कि यह परियोजना सरकार की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में चल रहे प्रयासों के साथ मेल खाती है। प्रस्तावित फैक्ट्री गुजरात के एक औद्योगिक क्षेत्र में स्थित होगी, जहाँ राज्य की बुनियादी सुविधाएँ और तकनीकी कंपनियों के लिए प्रोत्साहन उपलब्ध हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 80 करोड़ रुपये का निवेश, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बड़े fabs की तुलना में छोटा है, पर यह स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ कर सकता है और विशेष अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त हो सकता है। इस वेंचर से कुशल रोजगार सृजन और आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निर्माण कार्य इस वर्ष के बाद में शुरू होने की संभावना है, बशर्ते नियामक मंजूरी और उन्नत उत्पादन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। इस युवा उद्यमी को सेमीकंडक्टर उद्योग की पूँजी‑गहन चुनौतियों को पार करने के लिए विभिन्न हितधारकों का समर्थन मिल रहा है।
सफलता मिलने पर यह कारखाना भारत में युवा‑उद्यमिता और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने का एक मॉडल बन सकता है, जिससे देश की तकनीकी क्षमता में वृद्धि होगी।
उद्यमी ने कहा कि यह परियोजना सरकार की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में चल रहे प्रयासों के साथ मेल खाती है। प्रस्तावित फैक्ट्री गुजरात के एक औद्योगिक क्षेत्र में स्थित होगी, जहाँ राज्य की बुनियादी सुविधाएँ और तकनीकी कंपनियों के लिए प्रोत्साहन उपलब्ध हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 80 करोड़ रुपये का निवेश, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बड़े fabs की तुलना में छोटा है, पर यह स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ कर सकता है और विशेष अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त हो सकता है। इस वेंचर से कुशल रोजगार सृजन और आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निर्माण कार्य इस वर्ष के बाद में शुरू होने की संभावना है, बशर्ते नियामक मंजूरी और उन्नत उत्पादन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। इस युवा उद्यमी को सेमीकंडक्टर उद्योग की पूँजी‑गहन चुनौतियों को पार करने के लिए विभिन्न हितधारकों का समर्थन मिल रहा है।
सफलता मिलने पर यह कारखाना भारत में युवा‑उद्यमिता और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने का एक मॉडल बन सकता है, जिससे देश की तकनीकी क्षमता में वृद्धि होगी।